बिलासपुर 14 जुलाई 2026। बिलासपुर में डीजल चोरी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। नेशनल हाईवे पर ट्रकों से डीजल चोरी करने के आरोप में हिरासत में लिए गए कुछ संदिग्धों को कथित तौर पर बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के थाने से छोड़ दिए जाने का मामला सामने आने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में जांच अधिकारी एएसआई उमेश उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक पूरा मामला कोनी थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि नेशनल हाइवे पर खड़ी भारी वाहनों से लगातार डीजल चोरी की शिकायत के बाद पुलिस ने एक्शन लिया था। कोनी पुलिस ने डीजल चोरी के मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों की गिरफ्तारी कर 200 लीटर चोरी का डीजल, दो स्कॉर्पियो वाहन और चोरी में इस्तेमाल होने वाले पाइप और लोहे की छड़ बरामद करने का दावा किया था। वहीं पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों के फरार होने की बात कही थी। हालांकि कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए।
वायरल वीडियो में पुलिस टीम ग्राम पंचायत सेमरताल के भदौरियाखार ‘बरपाली‘ में दबिश देकर बैसाखू लोनिया, राजू लोनिया, राजेश लोनिया, भानु लोनिया समेत अन्य लोगों को हिरासत में लेकर थाने ले जाती दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ लोगों के हाथों में हथकड़ी भी नजर आ रही है। आरोप है कि सोमवार सुबह बैसाखू राजेश, राजू और एक महिला को बिना किसी स्पष्ट कार्रवाई के थाने से छोड़ दिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस पर लेन-देन और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के गंभीर आरोप लगाए जाने लगे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले की जानकारी मिलते ही एसएसपी रजनेश सिंह ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि पुलिस ने पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया था। लेकिन जांच अधिकारी एएसआई उमेश उपाध्याय ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए बिना तीन लोगों को छोड़ दिया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए एसएसपी ने एएसआई उमेश उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही सीएसपी कोतवाली गगन कुमार को पूरे मामले की प्रारंभिक जांच सौंपते हुए सात दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।


