बिलासपुर 11 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान गर्भावस्था के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में शामिल नहीं हो सकीं महिला अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में पहले खारिज की गई याचिका को पुनः बहाल करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का फैसला किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के आधार पर फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि राज्य में पुलिस भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और अन्य कारणों से शारीरिक दक्षता परीक्षा वर्ष 2023 में आयोजित की गई। इस लंबे अंतराल के दौरान कई महिला अभ्यर्थी शादी के उपरांत गर्भवती हो गईं, जिसके चलते वे निर्धारित समय पर फिजिकल टेस्ट में शामिल नहीं हो सकीं। इन अभ्यर्थियों ने अदालत से आग्रह किया था कि मातृत्व और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें छह महीने या उचित अवधि का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि वे भर्ती प्रक्रिया से वंचित न हों।
इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले एक अन्य फैसले का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना था कि यह मुद्दा पहले ही न्यायिक रूप से तय किया जा चुका है। हालांकि, याचिकाकर्ता रोशनी केरकेट्टा ने पुनरावलोकन याचिका दायर करते हुए कहा कि जिस पुराने मामले का हवाला दिया गया था, उसका संबंध आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से था। उस फैसले में गर्भावस्था के कारण फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के प्रश्न पर न तो विस्तृत सुनवाई हुई थी और न ही कोई स्पष्ट न्यायिक निष्कर्ष दर्ज किया गया था।
‘सिर्फ दलील का उल्लेख फैसला नहीं होता’
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने की। अदालत ने माना कि पूर्व आदेश पारित करते समय तथ्यात्मक त्रुटि रह गई थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी पक्ष की दलील का केवल उल्लेख कर देना न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत उस मुद्दे पर स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज न करे। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि गर्भावस्था के आधार पर फिजिकल टेस्ट स्थगित करने का प्रश्न पहले ही तय हो चुका है।
अदालत ने 16 जनवरी 2026 को पारित अपना पूर्व आदेश वापस लेते हुए रोशनी केरकेट्टा और अन्य महिला अभ्यर्थियों की याचिकाओं को पुनः बहाल कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर स्वतंत्र रूप से होगी और सभी कानूनी एवं तथ्यात्मक पहलुओं पर नए सिरे से विचार किया जाएगा। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उन महिला अभ्यर्थियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जो गर्भावस्था के कारण पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं।
अब अदालत यह तय करेगी कि विशेष परिस्थितियों में उन्हें फिजिकल टेस्ट का दूसरा अवसर दिया जा सकता है या नहीं। यह मामला केवल पुलिस भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी नौकरियों में मातृत्व अधिकार, समान अवसर और महिला अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा माना जा रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।

