रायपुर18 जून 2026। छत्तीसगढ़ में कहने को सरकारी रिकार्ड में रेत घाट अगले 4 महीने के लिए बंद कर दिये गये है। लेकिन जमीनी कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। यहीं वजह है कि अब छत्तीसगढ़ जैसे शांतप्रिय प्रदेश में रेत के अवैध कारोबार पर वर्चस्व की लड़ाई में बेखौफ होकर खून बहाये जा रहे है। कोरिया जिले में घटित घटना ने न केवल तीन लोगों की जान ले ली, बल्कि प्रशासनिक निगरानी, राजनीतिक संरक्षण और अवैध खनन के पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक राजनीतिक संरक्षण में रेत का यह समानांतर साम्राज्य चलता रहेगा ?
गौरतलब है कि सोमवार 16 जून की रात कोरिया जिले के ग्राम नवगई में हुई दिल दहला देने वाली घटना में भाजपा नेता और सोनहत जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह, उनके भाई शिक्षक नागेंद्र सिंह और परिचित बिरेंद्र सिंह की मौत हो गई। आरोप है कि रेत कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई के चलते प्रतिद्वंद्वी गुट ने उनकी फॉर्च्यूनर को पहले टिपर से टक्कर मारकर घेरा और फिर कार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इस घटना के दौरान बाहर निकलने की कोशिश करने वालों पर भी लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया गया।
रेत घाट से शुरू हुई दुश्मनी, मौत पर जाकर हुई खत्म
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्र में रेत खनन, परिवहन और कमीशन के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। एक पक्ष के पास रेत घाट का ठेका था, तो दूसरा पक्ष परिवहन कार्य से जुड़ा था। दोनों ही पक्ष राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं। पहले भी कई बार विवाद और शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि महीनों से सुलग रहा विवाद आखिरकार तीन लोगों की मौत का कारण बन गया।
राजनीतिक संरक्षण के बिना क्या संभव है इतना बड़ा नेटवर्क ?
कोरिया जिले की यह घटना सिर्फ आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां अवैध खनन और रेत कारोबार को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती हैं। लेकिन कार्रवाई अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है। प्रदेश के कई जिलों में रेत घाटों, परिवहन और अवैध उत्खनन को लेकर समय-समय पर विवाद होते रहे हैं। लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कभी भी जवाबदार विभाग और पुलिस अधिकारी सख्त कार्रवाई नहीं कर सके। यहीं वजह है कि छत्तीसगढ़ में आज रेत का अवैध कारोबार रसूख और राजनीतिक संरक्षण में लगातार फलता-फूलता रहा है।
तीन मौतों के बाद फिर गरमाया माफियाराज का मुद्दा
कोरिया जिले में घटित इस हत्याकांड के बाद पुलिस ने भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी, उसके बेटे और रिश्तेदारों समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। चार आरोपियों को हिरासत में भी लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। लेकिन तीन मौतों के बाद अब बहस सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। सवाल उस पूरे सिस्टम पर उठ रहे हैं, जिसके साए में रेत माफिया, अवैध खनन और वर्चस्व की राजनीति लगातार पनपती रही है।
आखिर कब तक रेत के काले कारोबार में लोगों की जान जाती रहेगी ?
सोनहत की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और उससे जुड़े राजनीतिक-आर्थिक गठजोड़ पर लगा गंभीर आरोप है। तीन लोगों की मौत के बाद अब प्रदेश में यह मांग तेज हो रही है कि रेत कारोबार की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किन संरक्षणों के दम पर यह खूनी वर्चस्व की लड़ाई यहां तक पहुंची। क्योंकि यदि व्यवस्था नहीं बदली, तो रेत का यह काला कारोबार आगे भी ऐसी ही भयावह घटनाओं को जन्म देता रहेगा।

