कोरबा 20 अगस्त 2026। कोरबा वन मंडल में लकड़ी तस्करी, वनभूमि पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग के अधिकारियों के सामने सख्त तेवर दिखाए हैं। मंत्री के कोरबा दौरे के दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि शिकायतों और पत्राचार के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई, तो उन्होंने मौके पर ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी मांगी। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर मंत्री ने नाराजगी जताई और पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि लकड़ी तस्करी, वनभूमि पर अतिक्रमण या किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण देने का मामला गंभीर है। जांच में शिकायतें सही पाई गईं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि कोरबा वन मंडल का बालको और कोरबा रेंज पिछले लंबे समय से विवादों में रहा है। सूबे में सरकार बदलने के बाद भी इस रेंज में अफसरों की मनमानी खत्म नहीं हुई। ताजा मामला कोरबा रेंज अंतर्गत सीएसईबी कॉलोनी कोरबा पूर्व से काटी गई साल की लकड़ी को वन विभाग के डिपों में जमा करने के बजाये अभनपुर रायपुर भेजे जाने का मामला सुर्खियों में बना था। इसी तरह बालकों रेंज में पिछल लंबे समय से चल रहे वन्य जीवों के शिकार, अवैध पेड़ों की कटाई के साथ ही वनभूमि में अतिक्रमण के मामले को लेकर रेंजर जयंत सरकार पर गंभीर आरोप लग रहे थे। स्थानीय जन प्रतिनिधियों की शिकायत पर उद्योंग मंत्री लखनलाल देवांनग ने भी वन मंत्री को पत्र लिखकर रेंजर जयंत सरकार के खिलाफ मिल रही शिकायतों की जांच कर कड़ी कार्रवाई करने पत्र लिखा था।
लेकिन 1 साल बीतने के बाद भी इस पूरे मामले में कोई एक्शन नहीं हो सका। कोरबा और बालको रेंज से जुड़ी शिकायतों को लेकर मीडिया के सवाल पर मंत्री केदार कश्यप ने सीसीएफ से सीधे जानकारी ली। बताया जा रहा है कि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि शाम की समीक्षा बैठक में पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद PCCF अरुण पांडेय को भी पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
लकड़ी तस्करी का मामला भी चर्चा में रहा
वन मंत्री केदार कश्यप के कोरबा प्रवास के दौरान कोरबा रेंज की सीएसईबी कॉलोनी से काटी गई साल की लकड़ी का मामला भी सामने आया। मामले के सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया गया कि सीएसईबी कॉलोनी से काटी गई साल की लकड़ी को वन विभाग के डिपो में जमा कराने के बजाय रायपुर के अभनपुर स्थित एक मिल में भेज दिया गया था। सीएसईबी विभाग के एक अधिकारी की शिकायत के बाद वन विभाग हरकत में आया। इसके बाद डीएफओ के हस्तक्षेप से मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने अभनपुर स्थित मिल में कार्रवाई कर करीब 9 लाख रुपये कीमत की लकड़ी बरामद कर जब्त की थी।
वहीं इस पूरे मामले में वन विभाग की ओर से सिविल लाइन थाने में करीब 2 लाख रुपये की लकड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की बात सामने आई। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को लकड़ी की कटाई और उसके परिवहन की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि बड़ी मात्रा में काटी गई लकड़ी को आसानी से बाहर भेजने के लिए लकड़ी कटाई की जिम्मेदारी संभालने वाले कुदमुरा रेंज के नवपदस्थ रेंजर को एक लकड़ी तस्कर का नाम दिया गया था। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इसकी बारीकी से और निष्पक्ष जांच की जाती है तो वन विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल वन मंत्री केदार कश्यप के सख्त निर्देश के बाद विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है।
बालको रेंज में अतिक्रमण और अवैध कटाई की शिकायतें
बालको रेंज को लेकर भी लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें वनभूमि पर अतिक्रमण, अवैध पेड़ कटाई और वन्यजीवों के शिकार जैसे आरोप शामिल हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी वन मंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन शिकायत के लंबे समय बाद भी कार्रवाई नहीं होने का सवाल जब केदार कश्यप के सामने उठा, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया।
अब जांच रिपोर्ट पर नजर
मंत्री की सख्ती के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन शिकायतों पर लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार था, क्या उनकी जांच वास्तव में जिम्मेदारी तय करने तक पहुंचेगी ? कोरबा वन मंडल के बालको और कोरबा रेंज से जुड़े मामलों में अब विभागीय जांच की दिशा और उसके नतीजे पर सभी की नजर है। वन मंत्री के सख्त रुख ने विभागीय अधिकारियों पर जवाबदेही का दबाव जरूर बढ़ा दिया है, लेकिन असली परीक्षा जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई की होगी।


