कोरबा 28 जून 2026। कोरबा में भाजपा नेता शिवबालक सिंह तोमर पर जानलेवा हमला करनेे वाले जिला पंचायत सदस्य के अवैध निर्माण पर आज नगर निगम का बुलडोजर चल गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माणाधीन मकान और दुकान को ध्वस्त कर दिया गया। लेकिन इस कार्रवाई के साथ सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि…..क्या नगर निगम को अवैध निर्माण तभी दिखाई देते हैं, जब किसी बड़े अपराध में किसी का नाम सामने आता है ?
गौरतलब है कि पिछले दिनों बीजेपी नेता शिवबालक सिंह तोमर पर जिला पंचायत सदस्य रज्जाक अली ने जानलेवा हमला कर दिया था। इस घटना में बीजेपी नेता को गंभीर चोट आई थी। घटना के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और इस वारदात के मुख्य आरोपी रज्जाक अली समेत उसके 2 अन्य साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब नगर निगम ने आरोपी जिला पंचायत सदस्य के अवैध निर्माण पर आज बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई की गयी।
बताया जा रहा है कि सीतामढ़ी मुख्य मार्ग पर रेत घाट के ठीक रज्जाक अली द्वारा दो मंजिला इमारत का निर्माण कराया जा रहा था, जो कि पूरी तरह से अवैध था। इसकी पुष्टि होने के बाद आज भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस अवैध निर्माण को ढहा दिया गया। पुलिस और निगम प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भारी भीड़ मौजूद रहीं। पुलिस बल की मौजूदगी में निगम की टीम ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
अवैध निर्माण का आखिर निगम प्रशासन को क्यों नही चलता पता ?
सीतामढ़ी में हुई इस कार्रवाई के बाद शहर में एक बार फिर अवैध निर्माण और निगम की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चर्चा इस बात पर होने लगी है कि….आखिर शहर के व्यस्त मार्ग पर अवैध रूप से दो मंजिला इमारत कोई रातों-रात खड़ी नहीं हुई थी। प्रथम तल का निर्माण पूरा हो चुका था और उसमें लोग रह भी रहे थे, जबकि दूसरी मंजिल का काम जारी था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि….क्या नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी ? या फिर उन्होंने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं ? नगर निगम का कहना है कि दस्तावेजों की जांच में निर्माण अवैध पाया गया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
लेकिन सवाल यह है कि यह जांच पहले क्यों नहीं हुई ? क्या भवन की नींव पड़ते समय, दीवारें उठते समय और पहली मंजिल पूरी होते समय नगर निगम की निगरानी व्यवस्था छुट्टी पर थी ? यह पहला मामला नहीं है, कुछ दिन पहले एक कबाड़ी के आलीशान अवैध मकान पर भी बुलडोजर चला था। उस समय भी यही सवाल उठा था कि करोड़ों रुपये का निर्माण आखिर प्रशासन की नजर से कैसे बचा रहा। अब रज्जाक अली के मामले में भी वही कहानी दोहराई गई है। दोनों मामलों में कार्रवाई तब हुई, जब संबंधित व्यक्ति किसी बड़े विवाद या आपराधिक मामले के केंद्र में आया। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि….अवैध निर्माण के खिलाफ नियमित कार्रवाई नहीं, बल्कि घटनाओं के बाद कार्रवाई होती है।
शहर में और कितने अवैध निर्माण ?
कोरबा के कई इलाकों में बिना स्वीकृति या नियमों के विपरीत निर्माण की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। यदि नगर निगम के पास निगरानी तंत्र है, तो ऐसे निर्माण शुरुआती चरण में ही क्यों नहीं रोके जाते ? और यदि निगरानी तंत्र प्रभावी नहीं है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है ? आदतन अपराधी रज्जाक अली के निर्माण पर बुलडोजर चल गया, लेकिन क्या उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी जिनके कार्यकाल में यह निर्माण लगभग पूरा हो गया ?
क्या भवन अनुज्ञा शाखा, निरीक्षण तंत्र और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा कि इतने बड़े निर्माण की जानकारी उन्हें क्यों नहीं हो सकी ? अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कानूनी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि…..शहर में अवैध निर्माण पनपने ही न पाए। यदि हर बार किसी बड़ी वारदात के बाद ही निगम जागेगा, तो सवाल सिर्फ अवैध निर्माण पर नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी उठते रहेंगे।

