गरियाबंद 9 अक्टूबर 2026। गरियाबंद जिले के मैनपुर में बिजली विभाग की बकाया वसूली प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। मैनपुर बस स्टैंड स्थित साहू होटल के संचालक गुलशन साहू ने बिजली विभाग के अधिकारी और उनकी टीम पर 15 हजार रुपये नगद लेने का आरोप लगाया है। दुकानदार का दावा है कि रकम देने के तीन दिन बाद भी न तो उन्हें भुगतान की रसीद मिली और न ही दुकान का बिजली कनेक्शन बहाल किया गया। मामले में मोबाइल फोन पर पैसों की बातचीत की रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इस रिकॉर्डिंग की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गुलशन साहू के मुताबिक उनकी दुकान जिस परिसर में संचालित है, वहां का बिजली कनेक्शन स्वर्गीय प्रकाश साहू के नाम पर दर्ज है। इस कनेक्शन पर करीब 25,071.10 रुपये का बकाया बताया गया था। दुकानदार का आरोप है कि 6 अक्टूबर को बिजली विभाग की टीम बकाया वसूली के लिए दुकान पहुंची थी। टीम में अवर अभियंता (JE) शेखर चौधरी भी शामिल थे। गुलशन साहू का दावा है कि इस दौरान बिजली चोरी के मामले में पुलिस कार्रवाई और जेल भेजने की चेतावनी दी गई। उनका कहना है कि कार्रवाई के डर से उन्होंने 15 हजार रुपये नगद दिए। लेकिन दुकानदार के अनुसार, रकम देने के बाद भी उन्हें कोई आधिकारिक रसीद नहीं मिली और बिजली कनेक्शन भी बहाल नहीं हुआ।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कथित भुगतान को विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज किया गया या नहीं। इस मामले में दुकानदार ने मोबाइल फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग होने का दावा किया है। उनके मुताबिक बातचीत में 15 हजार रुपये देने और बिजली संबंधी कार्रवाई नहीं किए जाने का जिक्र है। हालांकि हमारी टीम इस रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, बातचीत के पूरे संदर्भ या इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती है। रिकॉर्डिंग की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही इस संबंध में कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकता है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि राशि बकाया बिल के भुगतान के तौर पर ली गई थी, तो उसकी आधिकारिक रसीद कहां है ? क्या भुगतान विभाग के अधिकृत माध्यम से लिया गया और क्या इसकी प्रविष्टि विभागीय रिकॉर्ड में की गई ?
दुकानदार का कहना है कि वह किराए के कमरे में होटल संचालित कर रहे हैं, जबकि बिजली कनेक्शन स्वर्गीय प्रकाश साहू के नाम पर है। उनके अनुसार, संपत्ति से जुड़े लोगों ने पहले बकाया बिल को किस्तों में चुकाने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इस स्थिति में बिजली विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित कनेक्शन पर बकाया राशि की स्थिति क्या है, भुगतान की जिम्मेदारी किसकी है और कनेक्शन बहाल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया क्या है।
विभाग की वसूली प्रक्रिया पर उठे सवाल
बिजली बिल की वसूली करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है। किसी उपभोक्ता से नकद राशि लेने का आरोप सामने आने पर भुगतान की रसीद, वसूली रजिस्टर और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच अहम हो जाती है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि…यदि 15 हजार रुपये लिए गए, तो उसकी आधिकारिक रसीद क्यों नहीं दी गई ? भुगतान के बाद भी बिजली कनेक्शन बहाल क्यों नहीं हुआ ? और क्या कथित भुगतान का विभागीय रिकॉर्ड में कोई उल्लेख है ? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब देखना होगा कि बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं। गुलशन साहू ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, संबंधित अधिकारी और बिजली विभाग का आधिकारिक पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है। मैनपुर का यह मामला अब केवल बिजली बिल के बकाया तक सीमित नहीं रह गया है। असली सवाल वसूली की पारदर्शिता, भुगतान के रिकॉर्ड और उपभोक्ता की शिकायत के समाधान का है। अब देखना होगा कि बिजली विभाग मामले की जांच कर इन सवालों का जवाब देता है या नहीं।


