नई दिल्ली 16 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने करीब 75 मिनट के भाषण में युवा शक्ति को विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं, नौजवानों और युवा शक्ति का बार-बार जिक्र किया और कहा कि देश को तेज गति से आगे बढ़ाने की कोशिशों का सबसे बड़ा लाभार्थी और साधक भारत का युवा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम होगी। उन्होंने युवाओं से जुड़े कई मुद्दों और भविष्य की संभावनाओं का जिक्र किया, लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण का एक दूसरा पहलू भी चर्चा में है, जिसमें उन्होने पेपर लीक और भर्ती विवाद जैसे ज्वलनशील मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया !
गौरतलब है कि हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर युवाओं ने प्रदर्शन किए हैं। इन आंदोलनों में युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता की मांग उठाई। इन प्रदर्शनकारियों का कहना रहा है कि वर्षों की मेहनत के बाद अगर परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं, तो इसका सीधा असर उनके भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे पर पड़ता है। लेकिन लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण में इन युवा आंदोलनों या पेपर लीक और भर्ती विवाद का सीधा उल्लेख नहीं हुआ।
Gen-Z की बढ़ती राजनीतिक आवाज
इन आंदोलनों की एक खास बात यह भी रही कि इनमें Gen-Z यानी युवा पीढ़ी की भागीदारी दिखाई दी। जिस पीढ़ी को अक्सर राजनीति से दूरी रखने वाली पीढ़ी माना जाता है, उसने रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी आवाज उठाई। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक युवाओं की सक्रियता ने यह संकेत दिया कि रोजगार और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दे नहीं रह गए हैं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री का युवाओं पर जोर राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण है। सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ रही है, लेकिन दूसरी तरफ युवाओं के बीच रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्तियों को लेकर उठ रहे सवाल सरकार के सामने चुनौती भी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का संदेश एक तरफ युवाओं को विकसित भारत का भागीदार बनाने की बात करता है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक सवाल यह है कि क्या सरकार युवाओं के रोजगार और निष्पक्ष भर्ती से जुड़े भरोसे को भी उतनी ही प्राथमिकता देगी ? यही मुद्दे आने वाले समय में युवा मतदाताओं और देश की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकते हैं।


