Health Tips: शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर एनीमिया का खतरा रहता है। यही वजह है कि लोग अक्सर ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर अधिक देखकर राहत महसूस करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हीमोग्लोबिन का जरूरत से ज्यादा बढ़ना भी किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है? लगातार हाई हीमोग्लोबिन की स्थिति को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। कुछ मामलों में इसकी वजह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का जरूरत से ज्यादा बनना होती है, जिससे खून गाढ़ा होने और रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है। इसका मुख्य काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाना है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इसका संतुलित स्तर जरूरी है। जब हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो इसे हाई हीमोग्लोबिन कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में वास्तव में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ने की स्थिति को एरिथ्रोसाइटोसिस कहा जाता है। वहीं, कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी के कारण भी रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन ज्यादा दिखाई दे सकता है।
पानी की कमी भी बढ़ा सकती है हीमोग्लोबिन का स्तर
हाई हीमोग्लोबिन की एक सामान्य वजह डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। जब शरीर में पानी कम हो जाता है, तो खून का तरल हिस्सा घट जाता है। ऐसे में लाल रक्त कोशिकाओं की वास्तविक संख्या बढ़े बिना भी हीमोग्लोबिन का स्तर अधिक दिखाई दे सकता है। इसे रिलेटिव पॉलीसाइथीमिया कहा जाता है। इसलिए ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन बढ़ा हुआ आने पर तुरंत किसी गंभीर बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। डॉक्टर की सलाह से दोबारा जांच और अन्य जरूरी परीक्षण कराना महत्वपूर्ण है।
धूम्रपान और फेफड़ों की बीमारी भी हो सकती है वजह
शरीर को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर किडनी एक हार्मोन के जरिए बोन मैरो को अधिक लाल रक्त कोशिकाएं बनाने का संकेत देती है। इससे हीमोग्लोबिन बढ़ सकता है। इस स्थिति को सेकेंडरी एरिथ्रोसाइटोसिस कहा जाता है।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
- धूम्रपान और तंबाकू का सेवन।
- लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी।
- स्लीप एपनिया यानी नींद में सांस रुकने की समस्या।
- लंबे समय तक अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहना।
- कुछ हृदय और किडनी संबंधी बीमारियां।
क्या वायु प्रदूषण भी हो सकता है जिम्मेदार ?
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण फेफड़ों और हृदय की सेहत को प्रभावित करता है। प्रदूषण के रक्त कोशिकाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी अध्ययन किए जा रहे हैं। हालांकि, केवल वायु प्रदूषण को हाई हीमोग्लोबिन का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा। इसके पीछे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं और जीवनशैली से जुड़े कारक भी हो सकते हैं।
पॉलीसाइथीमिया वेरा क्या है, जिससे बढ़ सकता है खून गाढ़ा होने का खतरा
हाई हीमोग्लोबिन के पीछे एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी पॉलीसाइथीमिया वेरा भी हो सकती है। यह बोन मैरो से जुड़ी बीमारी है, जिसमें शरीर जरूरत से ज्यादा लाल रक्त कोशिकाएं बनाने लगता है। यह बीमारी अक्सर JAK2 जीन में बदलाव से जुड़ी होती है।
इसके कुछ संभावित लक्षण हैं:
- बार-बार सिरदर्द होना।
- चक्कर आना।
- धुंधला दिखाई देना।
- नहाने के बाद, खासकर गर्म पानी से, त्वचा में खुजली होना।
- चेहरे का लाल दिखाई देना।
- थकान और कमजोरी महसूस होना।
हालांकि, कुछ मरीजों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए लगातार बढ़े हुए हीमोग्लोबिन की जांच जरूरी है।
हाई हीमोग्लोबिन से बढ़ सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बहुत अधिक हो जाती है, तो कुछ स्थितियों में खून की गाढ़ापन बढ़ सकता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और रक्त के थक्के बनने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे थक्के रक्त वाहिकाओं में रुकावट पैदा कर सकते हैं, जिससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर समस्याओं का खतरा हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में हाई हीमोग्लोबिन का जोखिम एक जैसा नहीं होता। इसका खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि हीमोग्लोबिन क्यों बढ़ा है और इसके साथ दूसरी कौन-सी स्वास्थ्य समस्याएं मौजूद हैं।
हीमोग्लोबिन बढ़ा मिले तो क्या करें ?
अगर ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन सामान्य से अधिक है, तो घबराने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दोबारा CBC टेस्ट, ऑक्सीजन लेवल, किडनी और फेफड़ों से जुड़ी जांच या अन्य परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना, धूम्रपान से बचना और नींद में सांस रुकने जैसी समस्याओं का इलाज कराना भी महत्वपूर्ण है। बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन लेना या खून पतला करने वाली दवाएं शुरू नहीं करनी चाहिए। याद रखें: हीमोग्लोबिन का संतुलित स्तर ही शरीर के लिए जरूरी है। कम हीमोग्लोबिन की तरह लगातार बढ़ा हुआ हीमोग्लोबिन भी जांच की मांग करता है। ब्लड रिपोर्ट में असामान्य स्तर दिखने पर उसकी वजह जानना सबसे जरूरी है।


