Health Tips: अगर आपके स्थायी दांत टूट जाएं तो उन्हें दोबारा प्राकृतिक रूप से उगाना फिलहाल संभव नहीं है। ऐसे में लोगों को डेंटल इम्प्लांट या डेन्चर का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि, वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटे हैं, जिससे भविष्य में इंसानों के प्राकृतिक दांत दोबारा उगाए जा सकें।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इंसान के जीवन में केवल दो बार दांत निकलते हैं….दूध के दांत और स्थायी दांत। एक बार स्थायी दांत गिर जाने के बाद शरीर उन्हें दोबारा नहीं बना पाता। इसी चुनौती का समाधान खोजने के लिए अब रीजेनरेटिव मेडिसिन और स्टेम सेल तकनीक पर शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्टेम सेल और टूथ बड्स (दांत बनने वाली शुरुआती कोशिकाओं) की मदद से लैब में प्राकृतिक दांत विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है।
यदि यह तकनीक सफल होती है तो भविष्य में मरीजों को कृत्रिम इम्प्लांट की बजाय प्राकृतिक दांत मिल सकेंगे। हाल ही में सेल रीजनरेशन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सूअरों जैसे जानवरों पर किए गए शुरुआती प्रयोगों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। हालांकि, इंसानों पर यह तकनीक अभी शुरुआती रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल के चरण में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे आम लोगों तक पहुंचाने से पहले सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर कई और परीक्षण किए जाएंगे।
कैसे तैयार होगा नया दांत ?
रिसर्च के दौरान दांत की प्रमुख परतों—इनेमल, डेंटिन, सीमेंटम और डेंटल पल्प—को दोबारा विकसित करने पर काम किया जा रहा है। इसके लिए स्टेम सेल, ग्रोथ फैक्टर्स और विशेष बायोमैटेरियल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि शरीर की प्राकृतिक पुनर्निर्माण प्रक्रिया को सक्रिय किया जा सके।
अभी इलाज का विकल्प नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक फिलहाल शोध के चरण में है और इलाज के रूप में उपलब्ध नहीं है। इसलिए दांत टूटने की स्थिति में फिलहाल डेंटल इम्प्लांट, ब्रिज या डेन्चर ही मानक और सुरक्षित विकल्प हैं। हालांकि, यदि यह शोध सफल रहा तो आने वाले वर्षों में दंत चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

