रायपुर 27 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2021 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब भर्ती प्रक्रिया से आगे बढ़कर मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में भर्ती के बदले कथित वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध फंड ट्रांसफर की परतें खुलने का दावा किया गया है। मामले में सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ईडी की गिरफ्त में हैं, जबकि जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत कई प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर चयन के लिए कथित तौर पर बड़ी रकम ली गई। सीबीआई की जांच में अब तक 47 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और 1.3 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। ईडी का आरोप है कि भर्ती के एवज में ली गई राशि का एक हिस्सा ‘ग्रामीण विकास समिति’ नामक संस्था के जरिए ट्रांसफर किया गया। जांच में सामने आया है कि इस संस्था से जुड़े अधिकांश सदस्य तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के परिजन या करीबी थे, जबकि संस्था की अध्यक्ष उनकी पत्नी पद्मनी सिंह सोनवानी थीं। एजेंसी इस पूरे लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच रही है।
कोचिंग संचालक पर 1.3 करोड़ रुपये वसूलने का आरोप
सीबीआई की चार्जशीट में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को कथित मुख्य बिचौलिया बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर 1.3 करोड़ रुपये वसूले। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से उत्कर्ष फरार है और ईडी उसकी तलाश कर रही है।
12 से अधिक भर्ती परीक्षाएं जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में आयोजित 12 से अधिक भर्ती परीक्षाओं की भी जांच की जा रही है। इनमें सीजीपीएससी-2021 के अलावा अन्य भर्तियां भी शामिल हैं। एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों के परिजनों को लाभ पहुंचाने और चयन के बदले मोटी रकम लेने के आरोपों की भी जांच जारी है।
29 आरोपी, जांच अभी जारी
इस मामले में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जे.के. ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके परिजन और कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर समेत 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। फिलहाल ईडी और सीबीआई दोनों एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। एजेंसियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और कथित मनी ट्रेल की विस्तृत पड़ताल जारी है। वहीं, मामले में आरोप तय होना और दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

