रायपुर, 28 जून 2026। कभी नक्सलियों के गढ़ के रूप में पहचान रखने वाला बस्तर का किसकोड़ो गांव अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिस जगह पर वर्षों तक बंदूक की छाया में नक्सलियों की बैठकें होती थीं, उसी स्थान पर अब लोकतंत्र की चौपाल सज रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड स्थित किसकोड़ो गांव में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर जनचौपाल लगाई, उनकी समस्याएं सुनीं और गांव को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने का भरोसा दिया। यह दृश्य न सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यक्रम था, बल्कि बदलते बस्तर की तस्वीर भी पेश करता दिखा।
उप मुख्यमंत्री शुक्रवार शाम किसकोड़ो पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने किसी औपचारिक मंच के बजाय ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस दौरान किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। जनचौपाल में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, बिजली व्यवस्था मजबूत करने, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल और मातला मार्ग पर पाइप पुलिया जैसी बुनियादी जरूरतों को प्रमुखता से उठाया। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन मांगों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल तक मरीजों की आवाजाही के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने और बिजली व्यवस्था में सुधार के भी निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं रहने दी जाएगी। अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो क्षेत्र नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। सुरक्षा बलों और प्रशासन के लगातार प्रयासों के बाद अब इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
‘पहले नक्सलियों की चौपाल लगती थी, अब सरकार की’
जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले इस गांव में नक्सलियों की चौपाल लगती थी, लेकिन आज पहली बार सरकार के उप मुख्यमंत्री गांव में बैठकर उनकी बातें सुन रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कभी शाम होते ही लोग घरों से निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने की कोशिश होती थी और सरकारी कर्मचारी यहां पदस्थापना से बचते थे। आज वही गांव विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
जैविक खेती और रोजगार पर भी जोर
उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण देकर उनका प्रमाणन कराया जाए और आसपास की पंचायतों को जोड़कर उत्पादों की ब्रांडिंग की जाए। साथ ही लघु वनोपज के प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए, ताकि ग्रामीणों की आय बढ़ाई जा सके।

