बीजापुर 9 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों का शिकार लगातार गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ताजा मामला बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व का है, जहां बाघ शिकार प्रकरण में लापरवाही सामने आने के बाद वन विभाग ने पासेवाड़ा रेंज के रेंजर समेत तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या केवल निलंबन से वन्यजीवों के शिकार पर रोक लग पाएगी ?
जानकारी के मुताबिक वन विभाग ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर रेंजर कमल कश्यप, डिप्टी रेंजर नरहरि बघेल और बीट गार्ड विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया है। शासन के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।एसडीओ मनोज बघेल के अनुसारए बाघ शिकार की घटना सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में संबंधित कर्मचारियों की कार्य में लापरवाही के संकेत मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
बढ़ते शिकार पर उठ रहे सवाल
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में हुई यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन क्षेत्रों में बाघए तेंदुआ, भालू, हाथी, हिरण और अन्य संरक्षित वन्यजीवों के शिकार तथा करंट, फंदे और जहर से मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद शिकार की घटनाएं पूरी तरह नहीं थम पा रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, आधुनिक निगरानी व्यवस्था और खुफिया तंत्र को और मजबूत किए बिना वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। वहीं स्थानीय स्तर पर निगरानी और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत भी लगातार महसूस की जा रही है।
गिरफ्तारी से आगे दोषसिद्धि सबसे बड़ी चुनौती
वन विभाग के सामने केवल शिकारियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है। अदालत में उनके खिलाफ ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत कर दोषसिद्धि सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अध्ययन के अनुसारए वन्यजीव अपराधों से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में आरोपी अदालत से बरी हो जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी प्रमुख वजह जांच के दौरान तकनीकी और कानूनी रूप से मजबूत साक्ष्य एकत्र नहीं हो पानाए फोरेंसिक जांच में देरी और सबूतों की कड़ी कमजोर पड़ जाना है। ऐसे में कई मामलों में आरोपियों को संदेह का लाभ मिल जाता हैए जिससे वन्यजीव अपराधियों में कानून का भय भी कम होता है।
संरक्षण की रणनीति पर फिर बहस
बीजापुर की घटना ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल घटना के बाद निलंबन या कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे शिकार की घटनाओं को पहले ही रोका जा सके। इसके लिए आधुनिक तकनीकए बेहतर खुफिया नेटवर्कए पर्याप्त वन अमला, त्वरित जांच और मजबूत अभियोजन व्यवस्था पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। फिलहाल इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगीए लेकिन यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन्यजीवों की सुरक्षा केवल कागजी योजनाओं से नहींए बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी और मजबूत कानूनी कार्रवाई से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

