कोरबा 22 जून 2026। सरकारी दफ्तरों को अक्सर शिकायतों और औपचारिक प्रक्रियाओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कोरबा जिले में जनदर्शन के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने प्रशासन का मानवीय चेहरा सामने ला दिया। आर्थिक तंगी के कारण अपनी बेटी के लिए स्कूल ड्रेस, किताबें और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री जुटाने में असमर्थ एक मां की चिंता को कलेक्टर कुणाल दुदावत ने गंभीरता से लिया और कुछ ही समय में बच्ची की पढ़ाई से जुड़ी सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी गई।
जानकारी के मुताबिक पुरानी बस्ती रानी रोड निवासी सुप्रिया मतवानी जनदर्शन में अपनी समस्या लेकर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी इस सत्र में इम्प्रेसिव मॉन्टेसरी प्ले स्कूल में केजी-1 कक्षा में प्रवेश लेने जा रही है, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे स्कूल ड्रेस, पुस्तक, कॉपियां, स्कूल बैग और अन्य जरूरी सामग्री खरीद पाने में सक्षम नहीं हैं।
बेटी की शिक्षा को लेकर मां की चिंता को देख कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले की संवेदनशीलता को समझा। और उन्होने तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देश पर बच्ची के लिए स्कूल गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, स्कूल बैग और जूते सहित आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई।
कलेक्टर की संवेदनशीलता ने मां-बेटी के चेहरे पर लाई मुस्कान
बच्ची के हाथों में स्कूल बैग और पढ़ाई की सामग्री पहुंचते ही मां के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखाई दी। सुप्रिया मतवानी ने जिला प्रशासन और कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतना त्वरित समाधान हो जाएगा। यह पहल केवल एक परिवार की मदद भर नहीं है, बल्कि उस सोच का उदाहरण है जिसमें प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि आर्थिक अभाव किसी बच्चे की शिक्षा के रास्ते में बाधा न बने। शासन की प्राथमिकता भी यही है कि हर बच्चा स्कूल पहुंचे और संसाधनों की कमी के कारण उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
जनदर्शन बना आम लोगों का भरोसेमंद मंच
कोरबा में कलेक्टर जनदर्शन लगातार जरूरतमंद लोगों के लिए राहत और समाधान का माध्यम बन रहा है। यहां पहुंचने वाले नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण कर प्रशासन यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सीधे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम भी कर रहा है। एक छोटी बच्ची की मुस्कान और उसकी पढ़ाई का रास्ता आसान बनाकर कोरबा प्रशासन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संवेदनशील प्रशासनिक पहल किसी भी सरकारी व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती हैं।

