केशकाल 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश के बीच कांकेर, केशकाल और बस्तर के कई इलाकों में नदी-नाले उफान पर हैं। कई जगह सड़कें जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है। इसी बीच केशकाल में शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया। स्कूल जा रहे अंग्रेजी के शिक्षक का वाहन अचानक तेज बहाव वाले नाले की चपेट में आ गया और देखते ही देखते शिक्षक वाहन समेत बहने लगे। गनीमत रही कि शिक्षक ने किसी तरह अपनी जान बचा ली।
जानकारी के मुताबिक घटना आज शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे की है। हाई स्कूल कुएंमारी में पदस्थ अंग्रेजी शिक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव स्कूल जाने के दौरान नाले को पार कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पानी का बहाव तेज हो गया और उनका वाहन पानी की चपेट में आ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि वाहन शिक्षक को साथ लेकर बहने लगा। शिक्षक ने हिम्मत दिखाते हुए किसी तरह वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन वाहन तेज बहाव में बह गया। हादसे के बाद शिक्षक के साथ स्थानीय लोगों ने वाहन की तलाश शुरू की।
करीब डेढ़ घंटे बाद वाहन एक पेड़ में फंसा हुआ मिला।इसके बाद स्थानीय निवासी रस्सी लेकर मौके पर पहुंचे। कुएंमारी और बावनीमारी संकुल के शिक्षकों तथा ग्रामीणों ने मिलकर वाहन को रस्सियों से बांधा। काफी मशक्कत के बाद वाहन को नाले से बाहर निकाला गया। इस हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटनास्थल के आगे करीब 100 फीट गहरा जलप्रपात बताया जा रहा है। अगर वाहन पेड़ में नहीं अटकता और पानी के तेज बहाव के साथ आगे निकल जाता तो शिक्षक की जान पर बन सकती थी। हादसे के बाद शिक्षक के सुरक्षित बचने पर स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर
बस्तर संभाग में लगातार बारिश के कारण हालात बिगड़े हुए हैं। कई नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। केशकाल घाट में भी बारिश के कारण वाहनों की लंबी कतार और जाम की स्थिति सामने आई थी। मौसम विभाग ने भी 10-11 सितंबर को छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई थी। हादसे के बाद ग्रामीणों ने इस मार्ग पर बनी पुलिया की सुरक्षा और निर्माण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यहां बड़ी और सुरक्षित पुलिया की जरूरत है, लेकिन मौजूदा पुलिया छोटी है।
ग्रामीणों के मुताबिक पुलिया के बीच गड्ढा होने के कारण बारिश के दौरान नाले में पानी का बहाव बढ़ने पर सड़क और पुलिया की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में तेज बारिश के दौरान इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा लगातार बना रहता है। शनिवार को शिक्षक की जान बच गई और वाहन भी पेड़ में अटकने से आगे नहीं बह सका। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा या बारिश के दौरान जोखिम वाले रास्तों की पहले ही सुरक्षा जांच की जाएगी ? ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने, पुलिया की तकनीकी स्थिति की जांच करने और जरूरत के मुताबिक सुरक्षित एवं बड़ी पुलिया बनाने की मांग की है।


