डोंगरगढ़ 31 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ बीजेपी के भीतर डोंगरगढ़ में संगठनात्मक असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे के दावे के बाद अब पार्टी के 26 पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं ने भी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर स्थानीय संगठन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने डोंगरगढ़ बीजेपी की एकजुटता और संगठनात्मक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस्तीफा देने वालों में पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष एम. तुलसी और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला मंत्री बलविंदर सिंह भाटिया समेत कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं। सभी ने अपना इस्तीफा भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को भेजा है।
इस्तीफा पत्र में नेताओं ने शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोट पर संगठन में परिवारवाद और गुटबाजी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जबकि निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा है। इससे पहले भी 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे की चर्चा सामने आई थी। हालांकि उस समय भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा था कि उन्हें ऐसा कोई इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन अब 26 नेताओं के इस्तीफे ने विवाद को और गहरा कर दिया है। इस्तीफा देने वाले नेताओं का दावा है कि यह छत्तीसगढ़ बीजेपी के इतिहास के सबसे बड़े सामूहिक इस्तीफों में से एक है।
डोंगरगढ़ में संगठन को झटका यहीं तक सीमित नहीं है। इससे पहले जमीनी कार्यकर्ता अनिल पांडेय और नगर पालिका के पार्षद अमित छाबड़ा भी पार्टी छोड़ चुके हैं। लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने स्थानीय संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लाने की कोशिश नहीं की, तो इसका असर डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल, डोंगरगढ़ में बढ़ती नाराजगी ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक चुनौतियों से भी जूझना पड़ सकता है।

