कोरबा 31 जुुलाई 2026। कोरबा जिले के कटघोरा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जिस प्रतिमा को ब्रॉन्ज (कांस्य) से बनाया जाना था, उस पर अब लाखों रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। पहली ही बारिश में प्रतिमा की परत उखड़ने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे तो विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए उप अभियंता को निलंबित कर दिया, लेकिन पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है…क्या सिर्फ एक इंजीनियर ही इस कथित गड़बड़ी का जिम्मेदार था ?
लीजिए! अब ये भी देख लीजिए.
प्रभु श्री राम के नाम पर चंदा और चढ़ावा चोरी करने वाले अब अपने नेताओं को भी नहीं छोड़ रहे.
छत्तीसगढ़ में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा के निर्माण में भी घोटाला कर लिया. ताँबे के भीतर सीमेंट भर दिया. ताँबा भी असली है या नहीं, यह भी जाँच का विषय… pic.twitter.com/E69zIvHeIm
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) July 31, 2026
कटघोरा नगर पालिका के अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा के लिए करीब 13.60 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि प्राक्कलन के अनुसार कांस्य प्रतिमा स्थापित करने के बजाय कंक्रीट की प्रतिमा पर ब्रॉन्ज जैसा पेंट कर उसे स्थापित कर दिया गया। बारिश के बाद प्रतिमा की परत उखड़ने लगी और गड़बड़ी सामने आ गई। मामले ने राजनीतिक रंग तब लिया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा…..”लीजिए! अब ये भी देख लीजिए. प्रभु श्री राम के नाम पर चंदा और चढ़ावा चोरी करने वाले अब अपने नेताओं को भी नहीं छोड़ रहे. छत्तीसगढ़ में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा के निर्माण में भी घोटाला कर लिया.
ताँबे के भीतर सीमेंट भर दिया. ताँबा भी असली है या नहीं, यह भी जाँच का विषय है. इस प्रतिमा के निर्माण कार्य का ठेकेदार भी भाजपा नेता ही है. वह भाजयुमो का मंडल अध्यक्ष है. स्व. अटल जी की आत्मा यह सब देखकर बहुत दुखी होगी.” विवाद बढ़ने पर कोरबा भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कलेक्टर को शिकायत देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को हटाने की भी मांग की गई। राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग का कहना है कि प्रतिमा निर्माण प्राक्कलन के अनुरूप नहीं था, प्रतिमा मानकों पर खरी नहीं उतरी और निर्माण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके लिए उप अभियंता जिम्मेदार हैं।
हालांकि इस कार्रवाई के बावजूद कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। जिस ठेकेदार ने प्रतिमा का निर्माण कराया उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। ऐसे में विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने फिलहाल सिर्फ एक अधिकारी पर कार्रवाई कर मामले की जिम्मेदारी सीमित करने की कोशिश की है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच सिर्फ निलंबन तक सीमित रहती है या फिर प्रतिमा निर्माण से जुड़े ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और पूरी निर्माण प्रक्रिया की जवाबदेही भी तय होती है। क्योंकि सवाल केवल एक प्रतिमा का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान से जुड़े निर्माण कार्य की पारदर्शिता का भी है।


