रायपुर10 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। शिक्षा विभाग की ओर से करीब 700 शिक्षकों के समन्वय से तबादले किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार की तबादला प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘ट्रांसफर उद्योग’ बताया है। वहीं, बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने बैज के आरोपों को खारिज करते हुए तबादले जरूरत और मिले आवेदनों के आधार पर किए गए हैं।
गौरतलब है कि सत्ता का वनवास काट रही कांग्रेस सत्तापक्ष पर लगातार हमलावर बनी हुई है। फिर सरकार के फैसले की बात हो या फिर शिक्षकों के तबादले की। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के साथ ही नेता प्रतिपक्ष और पीसीसी चीफ लगातार सरकार को घेरने में जुटे हुए है। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा 700 शिक्षकों का एक साथ तबादला आदेश जारी करने पर पीसीसी चीफ बैज ने शिक्षा मंत्री समेत सरकार की नीति पर सवाल उठाये है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि…..अगर शिक्षकों का तबादला करना ही था तो इसे शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले किया जाना चाहिए था।
सत्र शुरू होने के बाद करीब 700 शिक्षकों की तबादला सूची जारी किए जाने पर उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। बैज ने आरोप लगाया कि तबादलों की आड़ में वसूली और पैसे का खेल किया जा रहा है और प्रदेश में ट्रांसफर को एक तरह का ‘उद्योग’ बना दिया गया है। कांग्रेस के इस हमले के बाद अब सरकार की तबादला नीति और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दीपक बैज के आरोपों पर बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि…. जिन मामलों में आवश्यकता थी और जिन लोगों ने तबादले के लिए आवेदन किया था, उन आवेदनों का परीक्षण करने के बाद ही शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है।
पुरंदर मिश्रा ने बैज पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार को हर फैसले के लिए दीपक बैज से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि “जो आवश्यकता थी, जो आवेदन था, तब शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर किया है।” बीजेपी विधायक ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल को भी निशाने पर लिया। पुरंदर मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में तबादलों को लेकर अलग तरह की व्यवस्था थी और ‘इंडस्ट्रीज’ चलती थीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में आवेदन लिए जाते हैं, उनकी जांच और जरूरत का परीक्षण किया जाता है और इसके बाद तबादले का फैसला होता है।
तबादला सूची बनी सियासी मुद्दा
करीब 700 शिक्षकों के तबादले ने एक प्रशासनिक फैसले को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। कांग्रेस जहां तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता और समय पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी इसे आवश्यकता और आवेदनों के आधार पर लिया गया प्रशासनिक फैसला बता रही है। अब सियासी सवाल यह है कि क्या शिक्षकों के तबादले के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी नीति है ? अगर प्रक्रिया तय है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही और शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद इतनी बड़ी संख्या में तबादलों की जरूरत क्यों पड़ी ? फिलहाल बैज के आरोपों और बीजेपी के पलटवार के बाद शिक्षकों के तबादले का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया सियासी अखाड़ा बन गया है। कांग्रेस सरकार पर सवालों की बौछार कर रही है, तो बीजेपी भी पलटवार में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को कटघरे में खड़ा कर रही है।


