रायपुर 6 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था, बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पुलिस संसाधनों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस छिड़ने के संकेत मिल रहे हैं। रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा को विस्तृत पत्र लिखकर पुलिस कमिश्नरेट के पुनर्गठन, पुलिस बल में बढ़ोतरी और अधोसंरचना के विस्तार की मांग की है। सांसद ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को महज प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि आम नागरिकों के भरोसे और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है।
बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि रायपुर की आबादी, शहरी विस्तार और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन पुलिस बल और संसाधनों का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि राजधानी में प्रभावी पुलिसिंग के लिए केवल वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है।
राजधानी रायपुर की सुरक्षा, सुगम यातायात और बेहतर कानून-व्यवस्था केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि हर नागरिक के विश्वास और सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।
इसी उद्देश्य के साथ मुख्यमंत्री श्री @vishnudsai जी एवं उपमुख्यमंत्री (गृहमंत्री) श्री @vijaysharmacg जी को पत्र लिखकर रायपुर पुलिस… pic.twitter.com/wnUN79oi5W
— Brijmohan Agrawal (@brijmohan_ag) August 5, 2026
कमिश्नरेट के दायरे में बदलाव की वकालत
सांसद ने रायपुर नगर निगम के कई विकसित शहरी क्षेत्रों और स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट को अब भी ग्रामीण पुलिस के अधिकार क्षेत्र में होने को व्यावहारिक चुनौती बताया है। उन्होंने इन क्षेत्रों को पुलिस कमिश्नरेट में शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि इससे कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी। साथ ही भविष्य में चरणबद्ध तरीके से पूरे रायपुर जिले को कमिश्नरेट व्यवस्था में शामिल करने का सुझाव भी दिया है।
660 रिक्त पद और 500 अतिरिक्त जवानों की मांग
पत्र में बृजमोहन अग्रवाल ने संयुक्त रक्षित केंद्र में 660 से अधिक रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस बल की कमी का सीधा असर कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर पड़ रहा है। उन्होंने इन पदों पर शीघ्र भर्ती कराने के साथ अन्य जिलों से 500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की अस्थायी तैनाती की मांग भी की है। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस बल बढ़ाने, नए कार्यालय भवन और पर्याप्त शासकीय वाहन उपलब्ध कराने की भी आवश्यकता बताई है।
कानून-व्यवस्था को नागरिकों के भरोसे से जोड़ा
अपने पत्र में सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि राजधानी की सुरक्षा केवल प्रशासनिक व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के विश्वास, सुरक्षित माहौल और सुशासन से सीधे जुड़ा प्रश्न है। उनका कहना है कि राजधानी में रहने वाले लोगों को प्रभावी पुलिसिंग और त्वरित कानून-व्यवस्था का भरोसा मिलना चाहिए, जिसके लिए मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की जरूरत है।
फिर गरमाएगी सियासत
बृजमोहन अग्रवाल का यह पत्र ऐसे समय आया है, जब राजधानी में कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। माना जा रहा है कि इस पत्र के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा सकती है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री को लिखे गए बृजमोहन अग्रवाल के पत्रों को लेकर विपक्ष सरकार और भाजपा दोनों पर निशाना साध चुका है। ऐसे में राजधानी की पुलिस व्यवस्था पर उठे नए सवाल राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार सांसद के सुझावों पर क्या रुख अपनाती है और राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।
