रायपुर 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने नेताओं, पदाधिकारियों और संभावित टिकट दावेदारों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी धरना-प्रदर्शन, आंदोलन, जनसंपर्क अभियान या राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले संबंधित जिला कांग्रेस कमेटी और PCC को पूर्व सूचना देना तथा स्थानीय संगठन से समन्वय करना अनिवार्य होगा। कांग्रेस पार्टी के इस निर्देश का मतलब साफ है कि अब नेता अपने मन से कहीं पर भी तंबू तानकर धरना और विरोध प्रदेर्शन नहीं कर सकेंगे।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के इस फैसल को लेकर दलील दी जा रही है कि यह किसी तरह की अनुमति लेने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि चुनाव से पहले संगठनात्मक तालमेल मजबूत करने और पार्टी की गतिविधियों में एकरूपता लाने की कवायद है। पार्टी का मानना है कि इससे स्थानीय संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में कई नेताओं और संभावित टिकट दावेदारों ने स्थानीय संगठन को विश्वास में लिए बिना अलग-अलग धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर समेत कई जिलों से ऐसी शिकायतें लगातार प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच रही थीं। संगठन का मानना है कि समानांतर कार्यक्रमों से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनती है और गुटबाजी को बढ़ावा मिलता है।
टिकट के दावेदारों की बढ़ी चिंता
नए दिशा-निर्देशों के बाद संभावित टिकट दावेदारों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि स्थानीय मुद्दों पर कई बार तत्काल विरोध-प्रदर्शन या आंदोलन करना पड़ता है। ऐसे में पहले संगठन को सूचना देने और समन्वय की प्रक्रिया पूरी करने से राजनीतिक प्रतिक्रिया देने में देरी हो सकती है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि कोई नेता संगठनात्मक निर्देशों की अनदेखी करता है तो उसका असर भविष्य में टिकट वितरण के दौरान देखने को मिल सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
समन्वय की कमी रही बड़ी चुनौती
कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जिला कांग्रेस कमेटियों और स्थानीय विधायकों के बीच समन्वय की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में, जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं, वहां संभावित दावेदारों और विधायकों के बीच राजनीतिक गतिविधियों को लेकर खींचतान की स्थिति कई बार सार्वजनिक भी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन किसी भी तरह के गुटीय प्रदर्शन या शक्ति प्रदर्शन से बचना चाहता है।
यही वजह है कि अब हर राजनीतिक कार्यक्रम को संगठन के साथ समन्वय में करने पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य किसी नेता की सक्रियता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि चुनाव से पहले संगठन को एकजुट, अनुशासित और समन्वित रखना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना पालन होता है और क्या इससे संगठन के भीतर गुटबाजी पर अंकुश लग पाता है।


