रायपुर, 6 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ में आरक्षक भर्ती को लेकर चल रहा विवाद अब सड़क पर भी दिखाई देने लगा है। भर्ती अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन करना भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया। राजधानी रायपुर में सड़क जाम कर आवागमन बाधित करने के आरोप में कोतवाली थाना पुलिस ने भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।पुलिस के मुताबिक, 4 नवंबर को भीम आर्मी के बैनर तले करीब 100 से 150 कार्यकर्ता पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारी ओसीएम चौक पहुंचे और मुख्य सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 5,967 आरक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2023-24 में शुरू हुई थी। दिसंबर 2025 में परिणाम और चयन सूची जारी होने के बाद से ही भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कम अंक पाने वाले कुछ उम्मीदवारों का चयन हो गया, जबकि अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी चयन से बाहर रह गए। अभ्यर्थियों ने अलग-अलग शिफ्ट की परीक्षाओं में अंकों के नॉर्मलाइजेशन, फिजिकल टेस्ट में दौड़, ऊंचाई और सीना मापने की प्रक्रिया तथा कटऑफ और मेरिट सूची में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने और कथित गड़बड़ियों की स्थिति में नए सिरे से भर्ती कराने की मांग की थी।
भर्ती विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा रिक्त पदों को लेकर है। अभ्यर्थियों का दावा है कि कुल 5,967 पदों में से करीब 4,367 पदों पर ही चयन और नियुक्ति हुई है। लगभग 1,600 पद अब भी खाली हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई उम्मीदवारों के नाम एक से अधिक जिलों की चयन सूची में आने और अन्य कारणों से पद खाली रह गए। ऐसे में शेष पदों को भरने के लिए दूसरी चयन सूची जारी की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर अगस्त 2026 में कवर्धा में भी प्रदर्शन किया गया था। भर्ती अभ्यर्थियों के समर्थन में 4 नवंबर को भीम आर्मी ने राजधानी रायपुर में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ विरोध जताया था। मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने के दौरान आंदोलन में शामिल सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने ओसीएम चैक पर चक्काजाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। जिससे आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हुआ था।
पुलिस का आरोप है कि समझाइश के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से नहीं हटे, जिसके कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर यातायात बाधित होने से एंबुलेंस और स्कूली बच्चों को लेकर जा रही बसें भी जाम में फंस गईं। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। उन्हें नवा रायपुर के तूता स्थित निर्धारित धरना स्थल पर जाकर प्रदर्शन करने की सलाह दी गई, लेकिन कार्यकर्ता सड़क खाली करने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने सार्वजनिक मार्ग बाधित करने के मामले में कार्रवाई करते हुए भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद, जिला अध्यक्ष देवेंद्र मैरिसा, युवराज ढीढी समेत 11 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा भर्ती का मामला
आरक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं का मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। जनवरी 2026 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने भर्ती से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नई नियुक्तियों पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई थी। याचिकाकर्ताओं ने फिजिकल टेस्ट कराने वाली आउटसोर्स कंपनी टाइम्स टेक्नोलॉजी की भूमिका पर सवाल उठाए थे। आरोप लगाया गया था कि 129 अभ्यर्थियों को गलत तरीके से अतिरिक्त अंक दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने की मांग भी की थी। एक तरफ भर्ती अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, रिक्त पदों पर दूसरी सूची और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सड़क पर प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ऐसे में आरक्षक भर्ती का विवाद अब केवल चयन सूची तक सीमित नहीं रह गया है। भर्ती अभ्यर्थियों के आंदोलन, राजनीतिक समर्थन और पुलिस कार्रवाई के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार रिक्त पदों और चयन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर क्या कदम उठाती है।


