कोरबा 27 जून 2026। कोरबा जिले में रेत खनन पर प्रतिबंध लागू है, बावजूद इसके हसदेव नदी में अवैध खनन का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। शुक्रवार को खनिज विभाग की ड्रोन निगरानी में सीतामढ़ी क्षेत्र में अवैध रेत खनन करते जेसीबी और परिवहन में लगे वाहन पकड़े गए। कार्रवाई में एक जेसीबी, एक टीपर और एक ट्रैक्टर जब्त किया गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिले में गठित टास्क फोर्स की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब हैै कि कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले में अवैध खनन पर सख्त रुख अपनाते हुए खनिज विभाग और टास्क फोर्स को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर ही खनिज उड़नदस्ता दल ने इस बार पारंपरिक तरीके की बजाय ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया। ड्रोन कैमरे में हसदेव नदी के भीतर जेसीबी से अवैध रेत उत्खनन की तस्वीरें रिकॉर्ड हुईं। इसके बाद टीम ने वाहन का पीछा करते हुए इमलीडुग्गू तक लोकेशन ट्रैक की और मौके पर पहुंचकर जेसीबी व रेत से भरे टीपर को जब्त कर लिया। इसी अभियान में राताखार क्षेत्र से अवैध रेत परिवहन कर रहे एक ट्रैक्टर को भी पकड़ा गया।
हालांकि कार्रवाई जितनी बड़ी है, उससे कहीं बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में अवैध खनन रोकने के लिए प्रशासन, पुलिस-परिवहन, राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स पहले से गठित है, तब प्रतिबंध के बावजूद नदी के भीतर खुलेआम जेसीबी से खनन कैसे होता रहा ? आखिर नियमित निगरानी के बावजूद ये गतिविधियां किसकी नजरों से बच रही थीं ? खनिज विभाग का कहना है कि अब अवैध खनन पर निगरानी के लिए ड्रोन का नियमित इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं, रात के अंधेरे में होने वाले अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए थर्मल इमेजिंग तकनीक भी अपनाई जाएगी।
इससे अंधेरे का फायदा उठाकर भागने या वाहन छिपाने की कोशिश करने वाले भी बच नहीं सकेंगे। आपको बता दे कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अवैध खनन और राजस्व की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यहीं कारण है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ लगातार सघन अभियान चलाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
ड्रोन और थर्मल तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ाने का फैसला प्रशासन की सख्ती को दिखाता है, लेकिन यह कार्रवाई एक बड़ा सवाल भी छोड़ जाती है। अगर ड्रोन ने कुछ घंटों की निगरानी में अवैध खनन पकड़ लिया, तो अब तक टास्क फोर्स की नियमित निगरानी में यह खेल क्यों नहीं पकड़ में आया ? यही सवाल अब प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।

