कोरबा, 22 जून 2026। कोरबा में एक इंस्टाग्राम स्टोरी को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार एक युवक की जान लेकर खत्म हुआ। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दोनों पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की शिकायत पहले ही कोतवाली थाने पहुंच चुकी थी, तो पुलिस ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर शुरुआती शिकायत को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद रवि यादव आज जिंदा होता।रामसागर पारा में रविवार देर शाम हुई इस सनसनीखेज वारदात ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीजे ऑपरेटर रवि यादव की दिनदहाड़े पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के रामसागर पारा का है। मृतक रवि यादव पेशे से डीजे ऑपरेटर था। बताया जा रहा है कि करीब एक सप्ताह पहले मोहल्ले में रहने वाले महेंद्र गंगवानी और रवि यादव के बीच इंस्टाग्राम स्टोरी को लेकर विवाद हुआ था। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट की नौबत आ गई और मामले की शिकायत थाने तक पहुंची थी। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इसे सामान्य विवाद मानकर नजरअंदाज कर दिया। रविवार को जब रवि यादव एक कार्यक्रम से लौट रहा था, तब रामसागर पारा में उसकी फिर से आरोपियों से मुलाकात हो गई। देखते ही देखते विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि महेंद्र गंगवानी ने अपने नाबालिग बेटे और साथियों के साथ मिलकर रवि यादव पर हमला बोल दिया।
बेरहमी से की गई पिटाई में रवि यादव की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने आरोपियों के घर पहुंचकर तोड़फोड़ की। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। हत्या के बाद हरकत में आई पुलिस ने अब 2 मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन सवाल अब भी वही है कि अगर शिकायत के समय ही सख्ती दिखाई जाती तो क्या यह हत्याकांड टल सकता था?स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ दो युवकों के बीच का विवाद नहीं था, बल्कि लगातार बढ़ रही दुश्मनी थी, जिसकी जानकारी पुलिस को पहले से थी।
इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और नतीजा एक युवक की मौत के रूप में सामने आया। अब पुलिस भले ही आरोपियों की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता बता रही हो, लेकिन रवि यादव के परिवार के लिए यह कार्रवाई काफी देर से हुई है। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या छोटी दिखाई देने वाली शिकायतों को नजरअंदाज करना कभी-कभी बड़े अपराधों की वजह बन जाता है ? कोरबा की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने के गंभीर परिणामों की भी कहानी बन गई है।

