जांजगीर-चांपा 25 जून 2026। भारतीय शादियों में अक्सर कहा जाता है कि दूल्हा राजा बनकर आता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक दूल्हा ऐसा आया कि दुल्हन को राजा नहीं, शराब का ब्रांड एंबेसडर नजर आने लगा। नतीजा यह हुआ कि सात फेरों से ठीक पहले ही दुल्हन ने दुल्हे की इस करतूत पर उसे रिजेक्ट करते हुए रिश्ता तोड़ दिया और घर के दरवाजेे से बारात बिना दुल्हन के लौट गई।
जानकारी के मुताबिक ये पूरा घटनाक्रम जांजगीर जिला के ग्राम कोसमंदा की है। बताया जा रहा है कि यहां जब बारात पहुंची, तो लड़की पक्ष के लोगों ने जमकर स्वागत-सत्कार किया, बैंड-बाजा बजा, रिश्तेदारों ने नाच-गाना किया। लेकिन असली कार्यक्रम तब शुरू हुआ जब दूल्हा द्वार पूजा के लिए पहुंचा। बताया जा रहा है कि जनाब इतने नशे में थे कि उन्हें खुद नहीं पता होगा कि वे शादी में आए हैं या किसी शराब प्रतियोगिता के शामिल होेने।
शराब के नशे में धुत्त दूल्हे के कदम लड़खड़ा रहे थे, शरीर डगमगा रहा था और होश कहीं गुम था। दुल्हन मुस्कान प्रधान ने जब यह दृश्य देखा, तो उसने वह फैसला लिया जिसे समाज अब साहसिक कदम बता रहा है। उसने साफ कह दिया….’शादी रद्द।‘ कहा जाता है कि विवाह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। मुस्कान ने शायद यही सोचा कि जो व्यक्ति शादी के दिन खुद को संभाल नहीं पा रहा, वह पूरी जिंदगी किसी और का साथ कैसे निभाएगा ? बताया जा रहा है कि दूल्हे को उसकी हालत पर दो-तीन थप्पड़ भी पड़े।
सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘रियलिटी चेक‘ और ‘इंस्टेंट डी-एडिक्शन थेरेपी‘ तक बता रहे हैं। हालांकि मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि इस कहानी का अंत आम घटनाओं जैसा नहीं हुआ। यहां लड़की पर समझौते का दबाव नहीं बनाया गया। परिवार उसके साथ खड़ा रहा। बाद में जांजगीर एसपी विजय पांडेय ने भी मुस्कान और उसके परिवार को सम्मानित किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उस सामाजिक समस्या की ओर ध्यान खींचा है, जहां कुछ लोग शराब को शान समझ बैठते हैं।
लेकिन शायद वे भूल जाते हैं कि नशा कभी सम्मान नहीं दिलाता, बल्कि कई बार सम्मान, रिश्ते और भविष्य तीनों छीन लेता है। मुस्कान का फैसला सिर्फ एक शादी से इनकार नहीं था। यह एक संदेश था कि रिश्ते बराबरी, सम्मान और जिम्मेदारी पर टिकते हैं, न कि शराब की बोतलों पर। और हां….जांजगीर जिले से बेटी के इस साहसिक कदम से उस रात एक बारात जरूर लौटी, लेकिन साथ में समाज के लिए एक बड़ी सीख भी छोड़ गई…कि ’’घोड़ी पर बैठने से कोई दूल्हा नहीं बन जाता, जिम्मेदारी निभाने की क्षमता भी होनी चाहिए।’

