कोरिया 21 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अंतरजातीय विवाह से नाराज परिजनों और समाज के कथित प्रमुखों ने एक गर्भवती युवती का पहले ससुराल से अपहरण किया, फिर कई दिनों तक उसे बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसकी गर्भावस्था खत्म करने के लिए जबरन गर्भपात की दवा खिलाने की कोशिश की गई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दो आरोपियों को सूरजपुर के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक घटना बैकुंठपुर थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार खड़गवां क्षेत्र की रहने वाली गोंड़ समाज की युवती ने कुछ महीने पहले दूसरे समाज के युवक से प्रेम विवाह किया था। करीब 20 दिन पहले, जब उसका पति काम पर गया हुआ था, तभी युवती के माता-पिता और समाज के कुछ लोग उसके ससुराल पहुंचे और विरोध के बावजूद उसे जबरन अपने साथ ले गए। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद उसे समाज के दो प्रमुखों रमेश टेकाम और दरोगा सिंह के हवाले कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक, सूरजपुर के चांदनी बिहारपुर ले जाकर रमेश टेकाम ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि बाद में दरोगा सिंह ने भी उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जब आरोपियों को उसकी गर्भावस्था की जानकारी मिली, तो उसे मेडिकल स्टोर भेजकर गर्भपात की दवा मंगवाई गई और उसे जबरन दवा खिलाने की कोशिश की गई। मेडिकल स्टोर जाने के दौरान पीड़िता को अपने पति से बात करने का मौका मिला। उसने पूरी घटना की जानकारी फोन पर दी। इसके बाद पति बैकुंठपुर कोतवाली पहुंचा और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए युवती को आरोपियों के कब्जे से बरामद किया। इसके बाद पीड़िता ने स्वयं थाने पहुंचकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई।
दोनों आरोपी गिरफ्तार, गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
बैकुंठपुर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। फरार चल रहे दोनों आरोपियों को सूरजपुर के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। कोरिया एसपी हरीश राठौर ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच की गई और दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली गई है।
कोरिया जिले में घटित यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के उन स्वयंभू ठेकेदारों की मानसिकता पर भी सवाल खड़ा करता है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधान से मिले अधिकारों को अपने सामाजिक फैसलों से कुचलने की कोशिश करते हैं। यदि पीड़िता के आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह घटना बताती है कि अंतरजातीय विवाह करने वाली एक महिला को कथित तौर पर समाज की ‘सजा’ के नाम पर अपहरण, यौन हिंसा और गर्भपात के दबाव जैसी अमानवीय यातनाएं झेलनी पड़ीं। अब इस मामले में पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया तय करेगी कि आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य सामने आते हैं और दोषियों को क्या सजा मिलती है, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

