रायपुर 12 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 के कानून बनने तक मौजूदा नियमों और सरकारी निर्देशों का पालन हर हाल में करना होगा। नए कानून की प्रक्रिया लंबित होने का हवाला देकर ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं दी जा सकती। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान जनहित मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को मौजूदा कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान गृह विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से पेश व्यक्तिगत शपथपत्र में सरकार ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण और नियमन के लिए नए कानूनी प्रावधान तैयार किए जा रहे हैं। गृह विभाग के 31 मार्च 2026 के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में संशोधन के लिए प्रारूप समिति का गठन किया गया था। समिति ने प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 का हिंदी और अंग्रेजी में प्रारूप तैयार कर लिया है। इसके साथ आवश्यक कार्रवाई रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी तैयार किए जा चुके हैं।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाएगा। इसके बाद विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। हाईकोर्ट ने माना कि प्रस्तावित विधेयक को लेकर सरकार की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसी आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार को बाकी प्रशासनिक और विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। मामले को अब आठ सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। कोर्ट ने इस दौरान सबसे अहम बात यह स्पष्ट कर दी कि नया कानून बनने का इंतजार करते हुए मौजूदा नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यानी जब तक छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 विधानसभा से पारित होकर कानून का रूप नहीं लेता, तब तक ध्वनि प्रदूषण से जुड़े वर्तमान कानून और सरकारी निर्देश प्रभावी रहेंगे। प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को इनके तहत कार्रवाई जारी रखनी होगी। हाईकोर्ट के इस निर्देश से साफ है कि राज्य में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर सरकार को मौजूदा व्यवस्था के तहत ही सख्ती बरतनी होगी। नए कानून की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन तब तक पुराने नियमों के पालन में किसी तरह की ढिलाई की गुंजाइश नहीं है।


