बालोद 5 अगस्त 2026। पेड़ों की अवैध कटाई और अवैध लकड़ी कारोबार के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बालोद जिले के अंगारी गांव में ग्राम सरपंच के मकान पर छापा मारा है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान घर से बड़ी मात्रा में सागौन के चिरान और लकड़ी के गोले बरामद किए गए। प्रारंभिक तौर पर जब्त लकड़ी की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। कार्रवाई के बाद वन विभाग अब यह पता लगाने में जुट गया है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी कहां से लाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
वन विभाग और उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने बालोद वन परिक्षेत्र के अंतर्गत अंगारी गांव में यह कार्रवाई की। तलाशी के दौरान बरामद सागौन लकड़ी को दो माजदा वाहनों में भरकर विभागीय काष्ठागार पहुंचाया गया। मामले में सरपंच के पति अश्विनी डड़सेना के खिलाफ वन विभाग ने जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब्त लकड़ी की मात्रा काफी अधिक है। फिलहाल सभी चिरान और लकड़ी के गोलों की गणना की जा रही है। इसके बाद लकड़ी का वास्तविक मूल्य तय किया जाएगा। विभाग का मानना है कि बरामद सागौन की कीमत लाखों रुपये हो सकती है।
डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि जांच का सबसे अहम बिंदु यह है कि बरामद सागौन की लकड़ी का स्रोत क्या है और उसका चिरान किस आरा मिल में कराया गया। जांच टीम लकड़ी की खरीद, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। यदि अवैध कटाई या परिवहन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान मकान में सागौन से बने फर्नीचर भी मिले हैं। वन विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि इन फर्नीचर में इस्तेमाल लकड़ी भी उसी कथित अवैध खेप का हिस्सा है या नहीं।
यदि ऐसा पाया जाता है तो इन्हें भी वन अधिनियम के तहत कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा। फिलहाल विभाग ने जब्त लकड़ी का पंचनामा तैयार कर दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद लकड़ी के स्रोत से लेकर उसके परिवहन और चिरान तक जुड़े सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जाएगी। बालोद में हुई इस कार्रवाई को प्रदेश में अवैध सागौन कारोबार के खिलाफ वन विभाग की अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में माना जा रहा है।

