कोरबा 20 जून 2026। कोरबा जिले के श्यांग क्षेत्र स्थित छिरहुट गांव में 23 वर्षीय नवविवाहिता की संदिग्ध हालत में मौत के तीन दिन बाद पुलिस ने कब्र खोदकर शव बाहर निकाला है। मायके पक्ष ने पति पर हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस में शिकायत करायी थी। शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में यह कार्रवाई की गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और अब जांच टीम को पोस्टिमार्टम रिपोर्ट का इंतजार हैं।
जानकारी के मुताबिक रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुमा निवासी घूरई बाई की शादी करीब तीन वर्ष पहले छिरहुट निवासी दिलीप बैगा से हुई थी। दंपती का डेढ़ वर्ष का एक बच्चा भी है। बताया जा रहा है कि 16 जून को घूरई बाई की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। ससुराल पक्ष ने तबीयत खराब होने से मौत होने की बात कहते हुए शव का अंतिम संस्कार करने के बजाय उसे दफना दिया। मौत की सूचना मिलने पर मृतिका के परिजनों ने पूरे मामले पर संदेह जताया। परिजनों का आरोप है कि दिलीप बैगा अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था और इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।
परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए श्यांग थाना में शिकायत दर्ज कर शव को कब्र से बाहर निकालकर जांच कराने की मांग की थी। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। औैर शुक्रवार को एसडीओपी, थाना प्रभारी और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में गांव पहुंचकर कब्र की खुदाई कराई गई। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। वहीं मृतिका के पति दिलीप बैगा ने हत्या के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी की मौत बीमारी के कारण हुई थी और उस पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
पारिवारिक विवाद बना संदेह की वजह
मायके पक्ष का आरोप है कि पति द्वारा चरित्र शंका को लेकर लगातार विवाद किया जाता था। परिजनों का दावा है कि इसी वजह से घूरई बाई की हत्या की गई और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से जल्दबाजी में शव को दफना दिया गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम व फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम भलपहरी में भी विवाहिता विनीता पाटले की संदिग्ध मौत के बाद दफनाए गए शव को चौथे दिन कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया था।
उस मामले में मायके पक्ष ने पति, सास और ससुर पर दहेज प्रताड़ना एवं हत्या के गंभीर आरोप लगाए थे। परिजनों का दावा था कि मृतका के शरीर पर चोट के निशान थे और नाक-मुंह से खून निकल रहा था, बावजूद इसके बिना पोस्टमार्टम के जल्दबाजी में शव को दफना दिया गया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में संदिग्ध मौतों की जांच प्रक्रिया और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल छिरहुट गांव के इस मामले में सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं।

