रायपुर 2 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी आधिकारिक पत्रिका ‘जनमन’ के संपादकीय सलाहकार डॉ. अनिल द्विवेदी को उनके सोशल मीडिया पर आरक्षण को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद पद से हटा दिया है। आरक्षण पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक विवाद के बीच सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्तर पर मामला संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई की गई।
जानकारी के मुताबिक डॉ. द्विवेदी की फेसबुक पोस्ट को सरकार ने गंभीरता से लिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ संवाद ने प्लेसमेंट एजेंसी को पत्र लिखकर उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की। पत्र में कहा गया है कि डॉ. द्विवेदी का कृत्य निविदा की शर्तों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
क्या थी विवादित टिप्पणी ?
डॉ. अनिल द्विवेदी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर आरक्षण को लेकर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि,
“शिक्षा शेरनी का दूध है, लेकिन आरक्षण कुतिया का वो दूध है, जिसे पीकर 33% वाला 90% वाले पर भौंकता है।”
इस टिप्पणी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई सामाजिक संगठनों और आरक्षण समर्थकों ने इसे आरक्षित वर्गों का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। पोस्ट की भाषा को लेकर भी व्यापक आलोचना हुई।
मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंचा मामला
विवाद बढ़ने के बाद मामला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संज्ञान में पहुंचा। सूत्रों के अनुसार सरकार ने टिप्पणी की भाषा और उसके सामाजिक प्रभाव को गंभीरता से लिया। इसके बाद डॉ. द्विवेदी ने अपनी फेसबुक पोस्ट हटा दी, लेकिन तब तक विवाद राजनीतिक मुद्दा बन चुका था। गौरतलब है कि ‘जनमन’ पत्रिका जनसंपर्क विभाग के तहत प्रकाशित होती है, जिसका प्रभार मुख्यमंत्री के पास है। ऐसे में विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी की टिप्पणी को लेकर सरकार भी विपक्ष के निशाने पर आ गई थी।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि आरक्षण प्राप्त करने वाले वर्गों के लिए इस तरह की भाषा संविधान और सामाजिक न्याय की भावना का अपमान है। उन्होंने कहा कि केवल पोस्ट हटाना या खेद जताना पर्याप्त नहीं है और सरकार को जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। महंत ने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं और जनसंपर्क विभाग भी उनके पास है। ऐसे में इस तरह की मानसिकता रखने वाले व्यक्ति का सरकारी जिम्मेदारी वाले पद पर बने रहना गंभीर सवाल खड़े करता है।
डॉ. अनिल द्विवेदी को पद से हटाए जाने को सरकार की ओर से विवाद पर त्वरित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्ष इस पूरे मामले को सामाजिक न्याय और आरक्षण के मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। अब इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि क्या सरकार का यह कदम विवाद थामने के लिए पर्याप्त होगा या विपक्ष इसे आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाए रखेगा।

