कोरबा 16 जुलाई 2026। कोयला उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाला कोरबा अब खनन प्रभावित परिवारों के बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में भी नई मिसाल पेश करने जा रहा है। कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष कुणाल दुदावत की पहल पर शुरू की गई ‘स्वामी विवेकानंद जिला खनिज न्यास शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ आर्थिक अभाव से जूझ रहे मेधावी विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहकर उन प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास है, जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते थे। खनन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के बेहतर भविष्य और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में इसे जिले की सबसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल में से एक माना जा रहा है।
गौरतलब है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले कई परिवार वर्षों से बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी से जूझते रहे हैं। ऐसे में कलेक्टर कुणाल दुदावत की संवेंदनशील पहल उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आई है, जो योग्यता होने के बावजूद आर्थिक अभाव के कारण इंजीनियरिंग, मेडिकल, तकनीकी और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते थे। लेकिन अब ‘स्वामी विवेकानंद जिला खनिज न्यास शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ के तहत कोरबा जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के बीपीएल परिवारों के विद्यार्थियों को देश के मान्यता प्राप्त शासकीय और शासन से संबद्ध शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि प्रवेश शुल्क, छात्रावास शुल्क और मेस शुल्क का भी प्रावधान किया गया है।
सबसे अहम बात यह है कि सहायता राशि सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान और अधिकृत छात्रावास के खाते में जमा होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को पिछली परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना होगा और किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में नियमित प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए हर वर्ष परीक्षा में सफलता, न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति और अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी होगा। इस योजना की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की सोच भी शामिल है।
चयन प्रक्रिया में मेधावी छात्र-छात्राओं, दिव्यांग विद्यार्थियों, अनाथ बच्चों, एकल अभिभावक वाले परिवारों और आईआईटी, एनआईटी, एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। कलेक्टर कुणाल दुदावत के इस संवेदनशील निर्णय के बाद जानकारों का मानना है कि कोरबा जैसे खनन क्षेत्र में यह पहल दूरगामी असर छोड़ सकती है। वर्षों से जिन परिवारों के बच्चे आर्थिक कारणों से बीच में पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते थे, उनके लिए अब उच्च शिक्षा हासिल करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा। इससे न केवल विद्यार्थियों का भविष्य संवरने की उम्मीद है, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
कलेक्टर कुणाल दुदावत की इस पहल को जिले में मानव संसाधन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि शिक्षा में किया गया यह निवेश आने वाले वर्षों में खनन प्रभावित क्षेत्रों के हजारों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मजबूत नींव रखेगा। आर्थिक अभाव के कारण जो प्रतिभाएं अब तक दब जाती थीं, उनके लिए यह योजना नई उम्मीद और नई उड़ान लेकर आई है।

