कोरबा 10 सितंबर 2026। कोरबा में चर्चित पुल चोरी के मामले के आरोपी मुकेश कुमार साहू उर्फ ‘बरबट्टी’ के खिलाफ अब कलेक्टर कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कुणाल दुदावत ने मामले की सुनवाई के बाद मुकेश साहू को एक वर्ष की अवधि के लिए जिला बदर करने का आदेश जारी किया है। आदेश के तहत मुकेश साहू को सिर्फ कोरबा ही नहीं, बल्कि बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिलों की राजस्व सीमाओं से भी एक साल तक बाहर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि कोरबा शहर में लोहे का पुल चोरी होने की घटना ने पूरे प्रदेश को चौंका दिया था। करीब 40 साल पुराने लोहे के पुल को गैस कटर से काटकर चोरी किए जाने के मामले ने पुलिस की निगरानी और कबाड़ के अवैध कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। पुलिस जांच में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी और मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर मुकेश साहू उर्फ बरबट्टी का नाम सामने आया था। इस घटना के बाद शहर में सक्रिय कबाड़ कारोबार और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन पर दबाव बढ़ा।
कलेक्टर की सख्ती के बाद अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर
पुल चोरी प्रकरण के बाद प्रशासन ने मुकेश साहू से जुड़े कथित अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की थी। नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माणाधीन दो मंजिला मकान को ढहाने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान विरोध और तनाव की स्थिति भी बनी थी, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी। इस कार्रवाई को कलेक्टर कुणाल दुदावत की अवैध कब्जे और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती के तौर पर देखा गया। अब इसी मामले में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी की अदालत से जिला बदर का आदेश सामने आया है।
प्रशासन के आदेश के मुताबिक मुकेश कुमार साहू उर्फ बरबट्टी को एक साल तक कोरबा समेत निर्धारित नौ जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर रहना होगा।यानी प्रशासन की कार्रवाई अब केवल अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिला बदर जैसे सख्त प्रतिबंधात्मक कदम तक पहुंच गई है। कोरबा में कबाड़ से जुड़े अवैध कारोबार को लेकर पहले भी प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई होती रही है। मुकेश साहू के ठिकानों पर पूर्व में GST कार्रवाई की खबरें भी सामने आई थीं।
वहीं पुल चोरी जैसे मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया कि शहर में सार्वजनिक संपत्तियों को गैस कटर से काटकर ले जाने की तैयारी आखिर किस स्तर तक पहुंच गई थी और कबाड़ के अवैध नेटवर्क पर निगरानी कितनी प्रभावी थी।अब कलेक्टर कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अवैध गतिविधियों और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े गंभीर मामलों में केवल आपराधिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।


