कोरबा 10 सितंबर 2026। कोरबा में फ्लाई ऐश के परिवहन और डंपिंग की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। NTPC जमनीपाली के धनरास राखड़ बांध से निकली फ्लाई ऐश को कथित तौर पर निर्धारित स्थान के बजाय रूमगरा में अवैध रूप से डंप किए जाने का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कार्रवाई करते हुए NTPC लिमिटेड, जमनीपाली पर 15 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की है। यह कार्रवाई इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ ही दिन पहले छुरीखुर्द में करीब 6000 टन फ्लाई ऐश के अवैध डंपिंग के मामले में NTPC पर 90 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई थी। उस मामले में करीब 200 ट्रकों के जरिए राखड़ को सरकारी जमीन पर डंप किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बावजूद इसके राख परिवहन में लगे ठेका कंपनी की मनमानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
गौरतलब है कि छुरीखुर्द की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि राखड़ परिवहन व्यवस्था की निगरानी और सख्त होगी, लेकिन अब रूमगरा में एक और मामला सामने आने से NTPC के निगरानी तंत्र और राखड़ परिवहन में लगे ट्रांसपोर्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।पर्यावरण संरक्षण मंडल के मुताबिक, 9 सितंबर की रात रूमगरा हवाई पट्टी चौक के पास गुप्ता होटल के नजदीक एक जमीन पर फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग की सूचना मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर वाहनों को पकड़ा और जांच की। जांच में पाया गया कि इन वाहनों में NTPC जमनीपाली के धनरास राखड़ बांध से फ्लाई ऐश लोड की गई थी और उसे संबंधित स्थल पर डंप किया जा रहा था। मौके पर डंप की गई राखड़ की मात्रा के आधार पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने NTPC के खिलाफ 15 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय की।
लगातार सामने आ रहे मामलों ने राखड़ परिवहन की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। NTPC के राखड़ बांध से फ्लाई ऐश निकलने के बाद उसे निर्धारित स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टरों के जरिए पूरी होती है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि वाहन किस जगह से राखड़ लेकर निकला, किस रूट से गया और आखिर में राखड़ कहां डंप हुई—इन सभी बिंदुओं की निगरानी कैसे की जा रही है ? अगर निगरानी व्यवस्था प्रभावी है तो निर्धारित स्थान के बजाय खुले या अनधिकृत स्थानों पर बार-बार राखड़ कैसे पहुंच रही है ? छुरीखुर्द मामले में भी परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, निर्माण परियोजना के लिए भेजी जाने वाली राखड़ को निर्धारित स्थल तक ले जाने के बजाय सरकारी जमीन पर डंप किए जाने का मामला सामने आया था।
पूरे मामले में NTPC पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई है, लेकिन इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि अवैध डंपिंग करने वाले वाहन और परिवहन व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कैसे तय होती है। क्योंकि यदि ट्रांसपोर्टर निर्धारित स्थान तक राखड़ पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही डंप कर रहे हैं, तो केवल अंतिम स्तर पर जुर्माना लगाने से समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल होगा। परिवहन के दौरान वाहनों की GPS ट्रैकिंग, निर्धारित रूट, डिलीवरी स्थल और डंपिंग की वास्तविक स्थिति की निगरानी को प्रभावी बनाने की जरूरत है। लगातार दो मामलों में कार्रवाई से यह जरूर संकेत मिल रहा है कि पर्यावरण संरक्षण मंडल ने फ्लाई ऐश के अवैध परिवहन और डंपिंग को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रसन्ना सोनकर ने स्पष्ट किया है कि फ्लाई ऐश का अवैध डंप किया जाना पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
विभाग की ओर से ऐसे मामलों में वाहनों को पकड़कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में भी नियम तोड़ने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। NTPC की अपनी पर्यावरण नीति में भी फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए अलग Ash Policy और Waste Management Policy सूचीबद्ध है। कोरबा जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में फ्लाई ऐश का सुरक्षित और नियमों के मुताबिक परिवहन सिर्फ पर्यावरण का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और आसपास की जमीन-पानी की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। छुरीखुर्द में 90 लाख रुपये की कार्रवाई के बाद अब रूमगरा में 15 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति ने एक बड़ा सवाल फिर सामने ला दिया है—क्या राखड़ परिवहन की मौजूदा निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है ? पर्यावरण विभाग की कार्रवाई ने फिलहाल NTPC और राखड़ परिवहन से जुड़े तंत्र की जवाबदेही बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि जुर्माने के बाद व्यवस्था में कितना सुधार होता है और राखड़ परिवहन में कथित मनमानी पर वास्तव में कितना अंकुश लग पाता है


