रायपुर 10 सितंबर 2026। दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार ने भी जर्जर और जोखिमपूर्ण भवनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे की पहले पहचान की जाए और समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के संभागायुक्तों, IG, कलेक्टरों, SP और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग में बने पीजी हाॅस्टल के धरासाई होने और छात्रों की मौत ने एक बार फिर सरकारी सिस्पटम पर सवाल खड़े कर दिये है। इस भयावह हादसे के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसी खामियों और जर्जर भवनों को लेकर सख्त निर्देश दिया है। कलेक्टर और एसपी को जारी मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब निगाहें प्रदेश के उन पुराने और जर्जर छात्रावास सरकारी स्कूल भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी रहेंगी, जहां लंबे समय से भवन की स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आज भी बच्चे ऐसे भवनों में पढ़ने और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचने को मजबूर हैं, जहां दीवारों में दरार, कमजोर छत, टूटे प्लास्टर या अन्य संरचनात्मक जोखिम की शिकायतें सामने आती रही हैं।
हॉस्टल- PG और कोचिंग सेंटर का भी होगा निरीक्षण
मुख्यमंत्री साय ने सभी जिलों में हॉस्टल, PG, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण और सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। जहां सुरक्षा संबंधी खामियां मिलेंगी, वहां सुधार के लिए समय-सीमा तय की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों के पालन में किसी तरह की शिथिलता न हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं हो सकती। खतरे की पहचान पहले हो और दुर्घटना होने से पहले उसे टाला जाए, यही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कलेक्टरों और SP को अपने-अपने जिलों में निरीक्षण की नियमित निगरानी करने और शासन के निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है। CM साय ने साफ कहा है कि यदि जोखिमपूर्ण भवनों की जांच या सुरक्षा संबंधी निर्देशों के पालन में लापरवाही या उदासीनता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यानी अब किसी जर्जर भवन में हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय सरकार का फोकस हादसे से पहले खतरे को खत्म करने पर है।
अवैध और मिलावटी शराब पर भी सख्ती
बैठक में मुख्यमंत्री ने अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ भी प्रदेशभर में संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को मिलकर कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाली अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख परिवहन मार्गों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के निर्देश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश के जर्जर स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य जोखिमपूर्ण सरकारी भवनों की कितनी गंभीरता से जांच होती है। आदेश कागजों से निकलकर जमीन पर कितना उतरता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। क्योंकि किसी जर्जर भवन की कमजोरी सामने आने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि बच्चों और आम लोगों की जान जोखिम में पड़ने से पहले ही खतरे को खत्म कर दिया जाए। छत्तीसगढ़ सरकार के ताजा निर्देशों ने अब जिला प्रशासन के सामने यही सबसे बड़ी जिम्मेदारी रख दी है।


