रायपुर 27 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में कथित बैंक लोन घोटाले की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। बलौदाबाजार के कारोबारी राजकुमार सराफ के ठिकानों पर हुई कार्रवाई को लेकर शुरू हुई चर्चाओं के बीच अब स्पष्ट हो गया है कि यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के दायरे में है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में 11.38 करोड़ रुपये के बैंक लोन के कथित दुरुपयोग, फर्जी वित्तीय लेन-देन और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। मामले में आयकर विभाग (IT) ने भी कार्रवाई की है।
CBI के मुताबिक, धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड ने बैंक से मिली एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट सुविधा का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के बजाय दूसरी कंपनियों के खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए किया। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी ने अपनी सहयोगी फर्मों के जरिए धनराशि को घुमाकर पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा किया, ताकि लोन खाते को नियमित दिखाया जा सके और बैंक को गुमराह किया जा सके। जांच में सामने आया है कि मार्च 2024 के दौरान कई करोड़ रुपये अलग-अलग फर्मों के खातों में भेजे गए और उसी दिन वही रकम पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा करा दी गई।
CBI का आरोप है कि इस तरह करीब 4.51 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को अंजाम दिया गया। एफआईआर के अनुसार, कंपनी को अप्रैल 2023 में 15 करोड़ रुपये की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट सुविधा मंजूर की गई थी। लेकिन बैंक का आरोप है कि इस राशि का उपयोग वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के बजाय संबंधित फर्मों के माध्यम से किया गया। समय पर कर्ज नहीं चुकाने के कारण 12 अक्टूबर 2024 को खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया और जनवरी 2026 तक बैंक का बकाया 11.38 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
मामले में कंपनी की डायरेक्टर राजलक्ष्मी सराफ, अभिषेक गुप्ता, गारंटर कुशल सोनी, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस बीच, बलौदाबाजार स्थित कारोबारी के ठिकानों पर CBI और आयकर विभाग की कार्रवाई से कारोबारी जगत में हलचल है। जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

