जीपीएम 24 जून 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में दिनदहाड़े हुए व्यापारी के अपहरण कांड का पुलिस ने महज तीन दिनों के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस ने अपहृत व्यापारी गिरीश यादव को बरामद करने के साथ ही तीन अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस के अनुसार अपहरण की जड़ में गांजा तस्करी से जुड़े कमीशन का विवाद था। जिसे लेकर आरोपियों ने व्यापारी को घर से उठा लिया था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो-एन वाहन बरामद किया है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों मरवाही थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े हथियार बंद बदमाशों ने व्यापारी के घर में घुसकर अपहरण कर लिया था। घटना की जानकारी के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। उधर इस घटना की जानकारी के बाद बिलासपुर रेंज आईजी खुद पुलिस की कार्रवाई पर नजर बनाये हुए थे। व्यापारी के अपहरणकांड की जांच में जुटी पुलिस ने जब तफ्तीश करना शुरू किया तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पुलिस जांच में सामने आया है कि अपहृत व्यापारी गिरीश यादव आरोपियों के साथ गांजा तस्करी के अवैध कारोबार में सहयोगी की भूमिका निभा रहा था। गांजा तस्करी से मिलने वाले कमीशन के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ा और इसी रंजिश में आरोपियों ने उसे अगवा करने की साजिश रच डाली।
पिस्टल दिखाकर घर से किया था अपहरण
आपको बता दे 20 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे ग्राम उषाढ़ निवासी गिरीश यादव को दो युवक पिस्टल दिखाकर उसके घर से जबरन एक बलेनो कार में बैठाकर ले गए थे। घटना के बाद गिरीश की पत्नी ने मरवाही थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। अपहरण के बाद आरोपियों ने गिरीश के घर में छूटे मोबाइल फोन पर कॉल कर 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस के सामने अपहृत की सुरक्षित बरामदगी सबसे बड़ी चुनौती बन गई।
अपहरणकर्ताओं तक ऐसे पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल और मरवाही पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने फिरौती मांगने वाले मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाली और तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। साइबर टीम ने मोबाइल लोकेशनए, टावर डंप, डिजिटल ट्रेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांची गई। इन सुरागों के आधार पर पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों की जानकारी मिली। अंतरराज्यीय नेटवर्क होने की आशंका पर पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में टीम रवाना की। लगातार निगरानी और तकनीकी ट्रैकिंग के बाद पुलिस ने अपहृत गिरीश यादव को सुरक्षित बरामद कर लिया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
तीन राज्यों के आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र निवासी पुंडलिक केंद्रे, राजस्थान निवासी चंद्रशेखर और उत्तर प्रदेश निवासी शेषपाल सिंह को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने अपहरण और फिरौती की साजिश कबूल कर ली है। वहीं अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस लिखी गाड़ी और हथियार बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो-एन वाहन बरामद किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वाहन में नीली बत्ती लगी हुई थी और उस पर ‘पुलिस‘ लिखी प्लेट भी लगाई गई थी।पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस वाहन का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में तो नहीं किया गया। साथ ही बरामद मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्डए चैट और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पूछताछ में यह साफ हो गया है कि विवाद गांजा तस्करी से जुड़े कमीशन के बंटवारे को लेकर था। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा इसके तार किन राज्यों तक जुड़े हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी और मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

