कोरबा 10 अगस्त 2026। कोरबा जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए जिला प्रशासन ने मत्स्य पालन को आजीविका से जोड़ने की पहल की है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने इसके लिए 2.95 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इस योजना के तहत हसदेव बांगो जलाशय में 125 केज कल्चर स्थापित किए जाएंगे, जबकि आधुनिक तकनीक से 5 बायोफ्लॉक तालाब भी बनाए जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि इससे समुदाय के लोगों को स्थायी रोजगार और स्वरोजगार का अवसर मिलेगा.
हसदेव बांगो जलाशय में केज कल्चर स्थापित करने के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास से 2 करोड़ 25 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।इसके तहत लालपुर स्थित पंजीकृत मत्स्य सहकारी समिति से जुड़े पहाड़ी कोरवा समुदाय के 25 सदस्यों के लिए 125 केज स्थापित होंगे।प्रशासन के मुताबिक, केज कल्चर के जरिए प्रत्येक सदस्य को कम से कम एक लाख रुपये की शुद्ध सालाना आय होने की उम्मीद है।इसके साथ ही स्थानीय और फुटकर मछली विक्रेताओं के लिए भी आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। इस परियोजना से हसदेव बांगो जलाशय के मत्स्य उत्पादन में करीब 250 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
5 बायोफ्लॉक तालाबों के लिए 70 लाख रुपये
इसी कड़ी में आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 5 बायोफ्लॉक तालाब बनाए जाएंगे. इसके लिए जिला खनिज संस्थान न्यास मद से 70 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक इकाई करीब 0.10 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी. प्रशासन के अनुसार, बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने वाले हितग्राही को एक इकाई से करीब 3 से 4 लाख रुपये सालाना आय होने की संभावना है।
स्थायी आजीविका पर जोर
जिला प्रशासन का फोकस विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लिए केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी आय का साधन उपलब्ध कराने पर है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। प्रशासन के मुताबिक जिला खनिज संस्थान न्यास मद और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अभिसरण से संचालित यह पहल पहाड़ी कोरवा समुदाय को आधुनिक मत्स्य पालन से जोड़ने में मदद करेगी। इस परियोजना से एक तरफ पहाड़ी कोरवा समुदाय की आय बढ़ाने का प्रयास होगा, वहीं दूसरी तरफ जिले में मछली उत्पादन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

