बिलासपुर 3 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के युक्तिकरण और स्थानांतरण को लेकर चल रहे विवाद पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ समेत 35 से अधिक याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षकों का स्थानांतरण, पदस्थापना और युक्तिकरण राज्य सरकार का प्रशासनिक विशेषाधिकार है। अदालत ऐसे मामलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक किसी दुर्भावना या कानून के स्पष्ट उल्लंघन के ठोस आधार सामने न आएं। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रशासनिक नीतियों के न्यायिक परीक्षण की सीमाएं तय हैं, और अदालत को सरकार के नीतिगत निर्णयों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करने के उद्देश्य से 2 अगस्त 2024 को शिक्षकों के युक्तिकरण संबंधी निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अनुवर्ती आदेश भी जारी किए गए। इन्हीं आदेशों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ और विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने दलील दी कि सरकार की नीति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा-25 के विपरीत है। उनका कहना था कि युक्तिकरण के कारण कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम हो जाएगी और सामान्य शिक्षकों को पूल में शामिल करना भी नियमों के अनुरूप नहीं है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाई.एस. ठाकुर ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि सभी विद्यार्थियों को समान रूप से शिक्षा मिल सके। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षकों का युक्तिकरण और स्थानांतरण पूरी तरह सरकार का नीतिगत एवं प्रशासनिक निर्णय है। यदि इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना या मनमानी का ठोस प्रमाण नहीं है, तो अदालत को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
कोर्ट ने युक्तिकरण संबंधी निर्देशों और उनसे जुड़े सभी अनुवर्ती आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार को शिक्षकों के युक्तिकरण और पुनर्संतुलन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और छात्र.शिक्षक अनुपात में सुधार आएगा। वहींए इस फैसले को राज्य में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

