रायपुर 28 जून 2026। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शामिल पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में व्यवस्थाओं की बड़ी पोल खुल गई है। डॉक्टर बनने का सपना लेकर पढ़ाई कर रहे करीब 100 एमबीबीएस छात्रों को पिछले दो दिनों से बिजली के बिना रहना पड़ा। वजह बनी करीब ढाई लाख रुपये का बकाया बिजली बिल, जिसके भुगतान नहीं होने पर विद्युत विभाग ने अस्थायी छात्रावास का कनेक्शन काट दिया। उमस भरी गर्मी में बिजली गुल होने से छात्रों को न सिर्फ अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी, बल्कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी प्रभावित हो गई।
जानकारी के मुताबिक मेडिकल कॉलेज के स्थायी छात्रावास का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक के करीब 100 छात्रों को शांति नगर स्थित किराए के भवन में अस्थायी रूप से रखा गया है। इसी छात्रावास का बिजली कनेक्शन बिल जमा नहीं होने के कारण काट दिया गया। छात्रों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि सामान्य बिजली कटौती हुई है, लेकिन कई घंटों तक सप्लाई बहाल नहीं होने पर उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से संपर्क किया। इसके बाद पता चला कि बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण विद्युत विभाग ने कनेक्शन काट दिया है।
बिजली बंद होने का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहा। मोटर बंद होने से पानी की आपूर्ति भी ठप हो गई। छात्रों को पीने के पानी से लेकर नहाने और दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी। मेडिकल कॉलेज परिसर में नए छात्रावास का निर्माण करीब तीन साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य में देरी के कारण छात्रों को लंबे समय तक निजी मकानों में रहना पड़ा। पिछले वर्ष छात्रों के आंदोलन के बाद शासन के निर्देश पर 120 सीट क्षमता वाले किराए के भवन में अस्थायी हॉस्टल की व्यवस्था की गई थी। अब उसी अस्थायी व्यवस्था में भी बिजली बिल का भुगतान समय पर नहीं होने से छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रबंधन ने छुट्टी का दिया हवाला
अनुबंधित छात्रावास वार्डन डॉ. प्रशांत जायसवाल ने बताया कि अवकाश के कारण भवन मालिक समय पर बिजली बिल जमा नहीं कर सके, जिसके चलते विद्युत विभाग ने कनेक्शन काट दिया। उनका कहना है कि अब बिल जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही बिजली तथा अन्य सुविधाएं सामान्य हो जाएंगी।
व्यवस्थाओं पर फिर उठे सवाल
प्रदेश के सबसे प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में भविष्य के डॉक्टरों को बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ा। यह घटना केवल एक बिल भुगतान में हुई चूक नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्थाओं और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है। जिस संस्थान से भविष्य के चिकित्सक तैयार हो रहे हैं, वहां यदि बुनियादी सुविधाओं का संकट पैदा हो जाए तो यह स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

