नई दिल्ली 26 जुलाई 2026। NEET-UG 2026 विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे युवाओं की भावनाओं के सम्मान और जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश की है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा के लिए सत्ता या पद नहीं, बल्कि देश और युवाओं का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की पहली बड़ी जीत करार दिया है।
भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं। आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री @dpradhanbjp जी का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है।
मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के… https://t.co/p12wLKGUkm
— Amit Shah (@AmitShah) July 25, 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा….“भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी भावना को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि…“मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है। पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा।” अमित शाह ने अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि….”राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री स्कूलों का विस्तार, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में प्रधान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने में भी उनकी भूमिका अहम रही।”
आपकोे बता दे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। जोशी खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। अब सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार लागू करने की चुनौती होगी।
छात्रों ने बताया आंदोलन की पहली जीत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवा संगठनों ने जश्न मनाया। प्रदर्शनकारियों ने इसे लंबे संघर्ष की पहली बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होने की शुरुआत है। हालांकि छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत कानून और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
क्या है सियासी संदेश ?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा इसे “युवाओं के सम्मान और जवाबदेही” का संदेश बताकर राजनीतिक नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर विपक्ष और आंदोलनकारी संगठन इसे सरकार पर जनदबाव की जीत के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसे में NEET विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र सरकार, विपक्ष और छात्र संगठनों के बीच एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बन चुका है। आने वाले दिनों में शिक्षा सुधारों पर सरकार के फैसले और विपक्ष की रणनीति इस मुद्दे की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

