रायपुर 16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को ‘छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ पारित कर राज्य में कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर दिया। इस कानून के लागू होने के साथ ही छत्तीसगढ़ जोखिम (रिस्क) आधारित नियामक व्यवस्था अपनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार का दावा है कि नए कानून से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को राहत मिलेगी और सरकारी मंजूरी की जटिल प्रक्रिया काफी हद तक आसान हो जाएगी।
नए कानून के तहत अब उद्योगों और कारोबारों को उनके आकार और गतिविधियों के आधार पर लो, मीडियम और हाई रिस्क श्रेणियों में बांटा जाएगा। कम जोखिम वाले कारोबारों को बार-बार सरकारी निरीक्षण और लंबी मंजूरी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। वहीं, बड़े और अधिक जोखिम वाले उद्योगों के लिए निगरानी और नियामकीय व्यवस्था पहले की तरह सख्त रहेगी। सरकार के मुताबिक, कम जोखिम वाले कारोबारों को सेल्फ सर्टिफिकेशन और थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन का विकल्प मिलेगा।
कारोबारी स्वयं यह घोषणा कर सकेंगे कि वे सभी निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या फिर अधिकृत इंजीनियर, आर्किटेक्ट अथवा विशेषज्ञ से प्रमाणपत्र लेकर प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे और मंजूरी की प्रक्रिया तेज होगी।अधिनियम की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि अब कई मामलों में कारोबारियों को हर साल लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण (रिन्यूअल) नहीं कराना पड़ेगा। यदि संबंधित विभाग तय समय-सीमा में आवेदन पर फैसला नहीं लेता है तो कुछ सेवाओं में डीम्ड अप्रूवल (स्वतः मंजूरी) का प्रावधान भी लागू होगा।
सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों की परियोजनाएं समय पर शुरू हो सकेंगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। नई व्यवस्था के तहत शुरुआती चरण में आठ विभागों की 43 सेवाओं को जोखिम आधारित मंजूरी प्रणाली में शामिल किया गया है। भविष्य में कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अन्य सेवाओं को भी इस दायरे में लाया जा सकेगा। पानी का कनेक्शन, भवन निर्माण योजना की स्वीकृति, फर्म और सोसायटी का पंजीकरण जैसी कई सेवाओं को भी सरल और समयबद्ध बनाया जाएगा। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तर पर निगरानी तंत्र भी बनाया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति और कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति इसकी मॉनिटरिंग करेगी।
दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में काम करेंगी। सरकार का दावा है कि इस सुधार से प्रदेश के करीब 15 लाख MSME कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा। उद्योग जगत के लिए इसे एक बड़े संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जहां सरकार नियंत्रण आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर भरोसे, जवाबदेही और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित मॉडल लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो छत्तीसगढ़ निवेश, उद्योग और कारोबार के लिए अधिक अनुकूल राज्यों की श्रेणी में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

