कोरबा 17 जून 2026। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और कोयला परिवहन क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे ने छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण चांपा-कोरबा रेल खंड पर तीसरी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 755 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह परियोजना मुख्य रूप से कोयला परिवहन को अधिक तेज, सुगम और बाधारहित बनाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। रेल मंत्रालय के अनुसार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाली 42 किलोमीटर लंबी चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन देश के सबसे व्यस्त कोयला परिवहन मार्गों में से एक की क्षमता बढ़ाएगी। यह रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ता है और देश के विभिन्न बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
गौरतलब है कि कोरबा को देश की ‘ऊर्जा राजधानी‘ कहा जाता है, जहां बड़ी संख्या में ताप विद्युत संयंत्र संचालित हैं। वर्तमान में इस रेल मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 55 जोड़ी मालगाड़ियां और 10 जोड़ी यात्री ट्रेनें संचालित होती हैं। रेलवे का मानना है कि आने वाले वर्षों में कोयला उत्पादन और परिवहन की मांग में भारी वृद्धि होगी। जिसके चलते मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव और बढ़ सकता है। आंकड़ों के मुताबिक एसईसीएल और एमसीएल की संयुक्त कोयला उत्पादन क्षमता वर्तमान में करीब 247 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जो भविष्य में बढ़कर 450 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही लगभग 200 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला परिवहन की आवश्यकता भी उत्पन्न होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस परियोजना को मंजूरी दी है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि तीसरी लाइन बनने से मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी, ट्रेनों के ठहराव और देरी में कमी आएगी तथा कोयला लदान की क्षमता बढ़ेगी। परियोजना के पूरा होने पर लगभग 5.95 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन संभव हो सकेगा। हालांकि परियोजना का मुख्य उद्देश्य कोयला परिवहन क्षमता बढ़ाना है, लेकिन इसके चलते यात्री सेवाओं को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी और भविष्य में नई यात्री सेवाएं शुरू करने की संभावना भी बनेगी। रेलवे के अनुसार यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ.साथ कोयला आधारित बिजली उत्पादन केंद्रों तक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
