कोरबा 20 जुलाई 2026। कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जिले में लगभग एक साल से नर्सिंग होम एक्ट के तहत बिना पंजीयन एक निजी सीबीसीटी (CBCT) सेंटर धड़ल्ले से संचालित होता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सेंटर में रेडियोलॉजिस्ट की जगह कॉमर्स की एक छात्रा मरीजों की जांच करती मिली। शिकायत के बाद जब कार्रवाई की बात आई, तो महज 15 मिनट के भीतर सेंटर में ताला लग गया। अब सवाल यह है कि आखिर कार्रवाई की सूचना सेंटर संचालक तक पहुंची कैसे ? इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की टीम पर सवालिया निशान लगा दिये है।
यह पूरा मामला कोरबा शहर के शारदा विहार पेट्रोल पंप के पास संचालित सर्वमंगला CBCT सेंटर का है। बताया जा रहा है कि सेंटर का संचालन दुर्ग के एक रेडियोलॉजिस्ट के नाम पर किया जा रहा था, लेकिन मौके पर न तो अधिकृत डॉक्टर मौजूद मिले और न ही कोई प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ। कई दिनों तक पड़ताल के दौरान हर बार सेंटर में एक युवती ही मरीजों की जांच करती मिली। पूछने पर उसने बताया कि डॉक्टर बाहर रहते हैं और मशीन का संचालन वही करती है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस सेंटर में मरीजों की जांच हो रही थी, वह जिला स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकृत ही नहीं था। यानी बिना वैधानिक अनुमति के मरीजों की जांच की जा रही थी और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हुई।
शिकायत के 15 मिनट बाद सेंटर बंद… किसने दी सूचना ?
जब पूरे मामले की शिकायत नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. अतीक सिद्दीकी से की गई, तो उन्होंने बिना रेडियोलॉजिस्ट के सेंटर संचालन को गैरकानूनी बताते हुए जांच का भरोसा दिया। लेकिन शिकायत के महज 15 मिनट के भीतर सेंटर में ताला लग गया और वहां मौजूद युवती भी गायब हो गई। अब मरीजों को बताया जा रहा है कि सेंटर एक सप्ताह तक बंद रहेगा। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि कार्रवाई के लिए टीम पहुंचने से पहले सेंटर संचालक तक सूचना किसने पहुंचाई ? क्या विभाग के भीतर से ही कार्रवाई की भनक लीक हुई ? यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है।
सीएमएचओ भी हुए हैरान, नोडल अधिकारी ने मानी बड़ी चूक
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केसरी ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। वहीं नोडल अधिकारी डॉ. अतीक सिद्दीकी ने स्वीकार किया कि संबंधित CBCT सेंटर नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं है। उन्होंने बताया कि जब टीम जांच के लिए पहुंची तो सेंटर बंद मिला। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि यदि सेंटर पिछले एक वर्ष से संचालित था, तो स्वास्थ्य विभाग की नियमित निरीक्षण टीम आखिर कर क्या रही थी ? क्या जिले में संचालित निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का कभी भौतिक सत्यापन किया जाता है या केवल कागजी कार्रवाई तक ही निगरानी सीमित है ?
स्वास्थ्य विभाग पर उठते बड़े सवाल
शहर के बीच अवैध रूप से संचालित सीबीसीटी सेंटर ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग के जवाबदार अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये है। मसलनबिना पंजीयन एक वर्ष तक सेंटर कैसे संचालित होता रहा ? नर्सिंग होम एक्ट की निगरानी टीम ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की ? शिकायत के 15 मिनट के भीतर सेंटर बंद होने की सूचना किसने लीक की ? बिना योग्य विशेषज्ञ के मरीजों की जांच कैसे कराई जा रही थी ? क्या जिले में ऐसे और भी अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हैं ?
क्या होता है CBCT और कौन कर सकता है इसका संचालन ?
CBCT (Cone Beam Computed Tomography) एक अत्याधुनिक 3D इमेजिंग तकनीक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से दंत चिकित्सा, मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, इम्प्लांट प्लानिंग, ऑर्थोडॉन्टिक्स और जबड़े की जटिल बीमारियों की जांच के लिए किया जाता है। ऐसे में सीबीसीटी सेंटर के वैधानिक रूप से संचालन के लिए….सेंटर का संबंधित प्राधिकरण और नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है। मशीन का संचालन केवल प्रशिक्षित रेडियोग्राफर-रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट ही कर सकता है। जांच की रिपोर्ट का मूल्यांकन और अंतिम प्रमाणन पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट द्वारा किया जाना अनिवार्य माना जाता है। रेडिएशन सुरक्षा के लिए AERB (Atomic Energy Regulatory Board) के नियमों का पालन करना जरूरी होता है। बिना प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा मशीन का संचालन मरीज की सुरक्षा और जांच की गुणवत्ता दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
बड़ा सवाल यही…!
जिस जिले में बिना पंजीयन, बिना विशेषज्ञ और बिना प्रभावी निगरानी के डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हों, वहां मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ? यह मामला केवल एक अवैध CBCT सेंटर का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और नर्सिंग होम एक्ट के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस मामले में केवल नोटिस जारी करता है या अवैध सेंटरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर जवाबदेही भी तय करता है। ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

