कोरिया 17 जून 2026। छत्तीसगढ़ में रेत के कारोबार को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल अब एक बार फिर खून से रंगे नजर आ रहे हैं। कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत उपाध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह की कथित रूप से जिंदा जलाकर हत्या और उनके भाई की इलाज के दौरान मौत ने न केवल कानून-व्यवस्था, बल्कि रेत कारोबार में राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक नियंत्रण पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक कोरिया जिले में रेत घाट के संचालन और अवैध उत्खनन को लेकर चल रहे विवाद ने बुधवार को हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि रेत कारोबार से जुड़े लोगों ने भरत सिंह की फॉर्च्यूनर वाहन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इस दौरान कार में सवार लोग बचने के लिए बाहर निगलते, लेकिन उन्हे बाहर नहीं निकलने दिया गया। इस घटना में वाहन में सवार भरत सिंह बुरी तरह झुलस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में उनके भाई नागेंद्र सिंह, वीरू सिंह और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए।
जिन्हे आनन फानन में अंबिकापुर में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान नागेंद्र सिंह ने भी दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि घटना से दो दिन पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था और इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बावजूद इसके हालात इतने बिगड़ गए कि विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब तनाव की जानकारी पुलिस और प्रशासन को पहले से थी, तब समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गईघ्
अवैध खनन पर राजनीतिक संरक्षण का आरोप
छत्तीसगढ़ में रेत घाटों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के कई जिलों से अवैध उत्खनन, रेेत घाट पर कब्जे और वर्चस्व की लड़ाई के साथ ही रॉयल्टी चोरी, दबंगई और राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आती रही हैं। कोरिया की यह घटना एक बार फिर उस आशंका को और मजबूत करती है कि रेत का कारोबार अब सिर्फ आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और वर्चस्व की लड़ाई का माध्यम बन चुका है। भरत सिंह उर्फ लल्ला क्षेत्र के प्रभावशाली भाजपा नेताओं में गिने जाते थे। ऐसे में उनकी जिंदा जलाकर हत्या ने यह बहस भी तेज कर दी है कि क्या खनिज कारोबार में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त समूहों के बीच संघर्ष अब जानलेवा रूप लेने लगा है ? यदि ऐसा है तो यह शासन-प्रशासन के साथ ही कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
सवालों के घेरे में पुलिस-प्रशासन
घटना के बाद सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा को देर रात मौके पर पहुंचना पड़ा। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और जांच जारी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर रेत के कारोबार में इतनी ताकत किसके संरक्षण से पैदा हो रही है कि विवाद सीधे हत्या तक पहुंच रहे हैं ? प्रदेश में खनिज संपदा जनता की संपत्ति मानी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई इलाकों में रेत घाटों को लेकर संघर्ष, हिंसा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आम होते जा रहे हैं। कोरिया की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जहां प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की लड़ाई में इंसानी जानें दांव पर लग रही हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि….आखिर जब रेत घाट को लेकर पहले से विवाद था, फिर भी पुलिस ने एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए ? क्या रेत के अवैध कारोबार में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त समूह सक्रिय हैं ? क्या इस घटना के बाद प्रदेशभर में अवैध रेत के कारोबार और राजनीतिक संरक्षण को लेकर निष्पक्ष जांच और कोई बड़ा फैसला लिया जायेगा ? कोरिया जिले में घटित यह दर्दनाक घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जब खनिज संसाधनों का कारोबार कानून से ज्यादा ताकतवर लोगों के प्रभाव में आने लगे, तो विवाद केवल आर्थिक नहीं रहते, बल्कि खूनी संघर्ष में बदल जाते हैं।
