रायपुर 5 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मैनपावर सप्लाई घोटाले में पूर्व आबकारी MD अरुणपति त्रिपाठी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। वह पिछले 95 दिनों से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले में सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की मैनपावर सप्लाई और उनके भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है।जांच एजेंसियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के नाम पर करीब 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी और बढ़े हुए बिल तैयार कर सरकारी खजाने से वास्तविक देय राशि से अधिक भुगतान हासिल किया।
मामले की जांच की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई थी। इस दिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर में कार्रवाई के दौरान तीन लोगों से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। जांच एजेंसी को संदेह था कि यह रकम मैनपावर एजेंसियों के लंबित बिलों को पास कराने के बदले दिए जाने वाले कथित कमीशन से जुड़ी है। इसके बाद राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच का दायरा बढ़ने के साथ मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ के भुगतान पर सवाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूरे मामले में करीब 182.98 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान की गड़बड़ी का आरोप है। इसमें अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान करीब 152.40 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान की बात सामने आई है। आरोप है कि कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्य दिवसों का वास्तविक लाभ नहीं मिला, जबकि एजेंसियों को इन मदों में भुगतान किया गया। जांच में भुगतान की गई रकम के एक हिस्से को कथित कमीशन के रूप में अधिकारियों और अन्य लोगों तक पहुंचाने की आशंका भी जताई गई है। EOW-ACB ने इस मामले में मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्जी बिल तैयार करने, भुगतान मंजूर कराने और कथित कमीशन के लेनदेन में कई लोगों की भूमिका रही है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अरुणपति त्रिपाठी को जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि अदालत में ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।


