नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2026। कर्नाटक में विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा के सवालों के बीच पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी मांग दोहराई और भाजपा को संसद भंग कर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दे दी। खास बात यह है कि कर्नाटक के जिन MLC चुनावों के नतीजों को लेकर राजनीतिक बहस हो रही है, उनमें भी मतपत्र का इस्तेमाल हुआ था। ऐसे में खरगे के बयान ने चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
VIDEO | Delhi: Congress president Mallikarjun Kharge, says, “Our protest is continued because of this ‘vote chori’ and what (CEC) Gyanesh Kumar has done mischief in Commission against that we are doing it and we will continue and all parties are supporting. Even tomorrow there is a mock parliament and on 1st (November) we are having this rally and people are coming from throughout country. We will fight because in democracy unless you fight, people will not be awakened. So, that’s why we are doing all that.”
When asked about MLC election results in Karnataka, Kharge, says, “Ballot paper still we ask. It doesn’t mean that we should leave because they are winning. Once upon a time they won only two Parliament seats… Sometimes it happens, that doesn’t mean that party has no hold. That ego should not be there in BJP that they have done very well. If that is the case, let them dissolve the Parliament and go on ballot paper.”
#Congress #MallikarjunKharge
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/bIyFWTfmBd)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 29, 2026
कर्नाटक MLC चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने कहा कि….कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर कायम है। उन्होंने कहा कि…..केवल चुनाव जीतने से किसी पार्टी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि दूसरी पार्टी की राजनीतिक पकड़ खत्म हो गई है। खरगे ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि वे जीत रहे हैं, हमें मैदान नहीं छोड़ देना चाहिए।” उन्होंने भाजपा के शुरुआती राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब पार्टी संसद में केवल दो सीटें जीतती थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उसे अपने प्रदर्शन पर इतना भरोसा है, तो संसद भंग कर बैलेट पेपर से चुनाव करा ले।
‘वोट चोरी’ के आरोपों पर विपक्ष का अगला दांव
एक तरफ कर्नाटक के चुनावी नतीजों पर बयानबाजी जारी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनाव आयोग की भूमिका तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस इन आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग कर रही है। ये विपक्ष के आरोप हैं; चुनावी अनियमितताओं से जुड़े दावों पर संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जवाबों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
30 अक्टूबर को प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’, 1 नवंबर को रैली
INDIA गठबंधन ने इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करने के लिए दो कार्यक्रमों की घोषणा की है। 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर रैली और मार्च प्रस्तावित है। प्रस्तावित कार्यक्रम में संसद की कार्यवाही की तर्ज पर प्रतीकात्मक चर्चा होगी, जिसमें विपक्षी सांसद और नेता अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस के अनुसार, इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सार्वजनिक बहस को आगे बढ़ाना है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विपक्ष का ‘जन महाभियोग’ एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है। यह मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है।
कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती
खरगे के बयान में एक तरफ भाजपा को चुनावी चुनौती है, तो दूसरी तरफ चुनाव प्रक्रिया पर विपक्ष की पुरानी मांग को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश भी दिखाई देती है। लेकिन कर्नाटक MLC चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए एक सवाल भी खड़ा किया है—जब चुनाव मतपत्र से हुए, तब पार्टी के प्रदर्शन पर उठ रहे सवालों का जवाब वह किस तरह देती है ? अब निगाहें 30 अक्टूबर के प्रतीकात्मक कार्यक्रम और 1 नवंबर की दिल्ली रैली पर रहेंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए INDIA गठबंधन अपने आरोपों को कितना व्यापक राजनीतिक समर्थन दिला पाता है और चुनावी प्रक्रिया पर बहस किस दिशा में जाती है, यह आगे के घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।


