कोरबा 27 सितंबर 2026। कोरबा में एसईसीएल के मेगा प्रोजक्ट में शामिल कुसमुंडा परियोजना के विस्तार के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की कार्रवाई को लेकर ग्राम जटराज के ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पूर्ण रूप से बसाए और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना ही मकान खाली कराने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। पत्रकार वार्ता कर प्रभावित ग्रामीणों ने बारिश के दिनों में मकान खाली कराने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रबंधन द्वारा कुछ प्रभावित परिवारों को मकान खाली करने के लिए महज तीन दिन का समय दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में गहराआक्रोश देखा जा रहा है।
रविवार को प्रभावित भूविस्थापित जोगीराम पटेल, दिलहरण सारथी, बृजेश श्रीवास समेत अन्य ग्रामीणों ने कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में पत्रकार वार्ता की। ग्रामीणों ने कहा कि कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए लंबे समय से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन पुनर्वास और बसाहट की व्यवस्था पूरी किए बिना अब मकान तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार जटराज गांव की भूमि का अधिग्रहण एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा चार चरणों में किया गया। वर्ष 1978-79 में CBA, 1983 में MPLRC, 1984 में MPLRC पूरक और 2010 में CBA की धारा 9(1) के तहत भूमि अधिग्रहण किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती तीन चरणों में उनके आवास प्रभावित नहीं हुए थे।
वर्ष 2010 में अंतिम चरण के अधिग्रहण के बाद अब करीब 16 वर्ष बाद अगस्त-सितंबर 2026 में गांव खाली कराने की प्रक्रिया तेज की गई है। ग्रामीणों की मुख्य आपत्ति विस्थापित परिवारों को अलग-अलग स्थानों पर बसाने को लेकर है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को सर्वमंगला नगर, 14 नंबर डम्प स्थल, वैशाली नगर/खमहरिया और 14 नंबर डम्प के दूसरे छोर पर बसाने की प्रक्रिया की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से एक साथ रहने वाले परिवारों को चार अलग-अलग स्थानों पर बसाने से सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने सभी प्रभावित परिवारों को एक ही स्थान पर बसाने की मांग की है।
बसाहट स्थल पर सुविधाओं का अभाव
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिन स्थानों पर प्लाट आवंटित किए जा रहे हैं, वहां पेयजल, बिजली, सड़क, नाली, मुक्तिधाम और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। 14 नंबर डम्प स्थल को लेकर ग्रामीणों ने सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्लाट के पास पोखरी में पानी भरा है और सुरक्षा बाउंड्रीवाल नहीं होने से हादसे का खतरा है। डम्प क्षेत्र में भूस्खलन की आशंका और सामुदायिक भवन की दीवारों में दरारें आने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।
मुआवजे को लेकर भी उठाए सवाल
भूविस्थापितों ने मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन की ओर से तैयार शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसमें मुआवजा राशि के आकलन और भविष्य में बदलाव नहीं करने जैसी शर्तें होने का दावा ग्रामीणों ने किया है। विरोध करने वाले ग्रामीणों को मुआवजा राशि ट्रिब्यूनल में जमा करने की बात कहे जाने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मुआवजे का पारदर्शी और सही आकलन किया जाए तथा प्रभावितों को उनकी जमीन और मकान का उचित मुआवजा मिले।
बारिश के बीच तीन दिन में मकान खाली करने का दबाव
ग्रामीणों ने बारिश के मौसम में मकान खाली कराने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कुछ प्रभावित परिवारों को मकान खाली करने के लिए महज तीन दिन का समय दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- पूर्ण बसाहट और मूलभूत सुविधाएं दिए बिना मकान तोड़ने पर रोक लगे।
- सभी प्रभावित परिवारों को एक ही स्थान पर बसाया जाए।
- पुनर्वास स्थल पर पेयजल, बिजली, सड़क, नाली सहित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- बारिश के दौरान मकान खाली कराने की कार्रवाई रोकी जाए।
- तीन दिन की मोहलत वाली कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
- मुआवजे का पारदर्शी और सही आकलन कराया जाए।
- मुआवजा राशि ट्रिब्यूनल में जमा कराने के नाम पर दबाव न बनाया जाए।
जटराज में कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास कार्य के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विस्थापन से पहले उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास, उचित मुआवजा और सुरक्षित बसाहट उपलब्ध कराई जानी चाहिए। दूसरी ओर, एसईसीएल और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद कार्रवाई की स्थिति और स्पष्ट होगी।


