जांजगीर 12 सितंबर 2026। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा थाना में पुलिस हिरासत में युवक शिव सहिस उर्फ गुल्लू की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद भले ही फिलहाल शांत होता नजर आ रहा हो, लेकिन पुलिस की कार्रवाई ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। परिजनों को शांत कराने के लिए स्टाम्प पेपर पर हर महीने 25 हजार रुपये देने का लिखित वादा किए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि चांपा थाना प्रभारी के स्टाम्प पेपर में दिये लिखित इकरार में हर महीने पीड़ित बच्चों के शिक्षा और भरण-पोषण के लिए 25 हजार रूपये हम महीने देने का इकरार किया गया है। बताया जा रहा है कि जांजगीर पुलिस के इस फैसले को लेकर राजनधानी रायपुर में पुलिस अधिकारियों काफी नाराज है।
जानकारी के मुताबिक पूरा मामला जांजगीर के चांपा थाना क्षेत्र का है। आपको बता दे पिछले दिनों चांपा पुलिस ने मेहंदीपारा निवासी शिव सहिस उर्फ गुल्लू को पुलिस ने महुआ शराब से जुड़े आबकारी मामले में हिरासत में लिया था। पुलिस के मुताबिक, शिव के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज रहे हैं। हिरासत के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे इलाज के लिए बीडीएम अस्पताल चांपा ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे जांजगीर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शिव की मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और चांपा थाने के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मृतक की पत्नी बच्चों के साथ धरने पर बैठ गई।
परिजनों ने परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और बच्चों की पढ़ाई व भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेने की मांग रखी थी। इसके अलावा परिवार ने मामले में जिम्मेदार बताए जा रहे पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग भी की। बढ़ते विरोध के बीच एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने पहले एक आरक्षक को निलंबित किया। इसके बाद चांपा थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया। यानी पुलिस विभाग की ओर से कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका था, लेकिन इसके बाद सामने आया स्टाम्प पेपर वाला लिखित आश्वासन अब पूरे मामले को एक अलग मोड़ दे रहा है।
स्टाम्प पेपर पर लिखा- हर महीने मिलेंगे 25 हजार
सामने आए स्टाम्प पेपर में चांपा थाना प्रभारी के हस्ताक्षर के साथ यह उल्लेख किया गया है कि ‘चांपा थाना प्रभारी के पद पर जो भी अधिकारी पदस्थ रहेगा, उसके द्वारा मृतक शिव सहिस के परिवार के बच्चों की शिक्षा और पोषण के लिए हर महीने 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसमें यह राशि लगातार देने और बच्चों को भी आगे सहायता जारी रखने की बात लिखी गई है। यही लिखित वादा अब पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले में पुलिस की ओर से निलंबन और लाइन अटैच जैसी कार्रवाई तो की गई, लेकिन थाना प्रभारी के स्तर से स्टाम्प पेपर पर परिवार को लंबे समय तक आर्थिक सहायता देने का वादा किस अधिकार और किस प्रक्रिया के तहत किया गया, यह बड़ा सवाल बन गया है।
पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा मामला
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि स्टाम्प पेपर पर इस तरह का वादा किए जाने से पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी नाराज हैं और इस फैसले को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हिरासत में शिव सहिस की मौत कैसे हुई, बल्कि यह भी है कि मामला शांत कराने के लिए पुलिस ने स्टाम्प पेपर पर ऐसा वादा आखिर किस स्तर पर और किस अधिकार के तहत किया ?
चांपा का यह मामला फिलहाल दो सवालों के बीच खड़ा है—एक, पुलिस हिरासत में शिव सहिस की मौत की असली वजह क्या थी और दूसरा, परिवार को जीवनभर आर्थिक सहायता देने का यह लिखित वादा पुलिस ने आखिर किस आधार पर किया ? दोनों सवालों के जवाब ही इस पूरे विवाद की अगली दिशा तय करेंगे। फिलहाल, जानकारों की मानें तो जांजगीर पुलिस का यह फैसला आने वाले समय में पूरे पुलिस विभाग के लिए गले की हड्डी बन सकता है। अब सवाल यही है कि पुलिस अपने ही इस फैसले से कैसे बाहर निकलती है। इसका जवाब तो आने वाला वक्त ही देगा।



