Health Desk। योग भारतीय संस्कृति और जीवनशैली का सदियों पुराना हिस्सा रहा है। योग के अलग-अलग आसनों में भद्रासन को खास महत्व दिया जाता है। देखने में यह आसन भले ही आसान लगे, लेकिन नियमित और सही तरीके से किया जाए तो शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। संस्कृत में ‘भद्र’ का अर्थ कल्याणकारी या शुभ होता है, इसलिए इसे कल्याणकारी आसन भी कहा जाता है।
भद्रासन में बैठने की मुद्रा शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर काम करती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह जांघों, टखनों और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करता है। भद्रासन को महिलाओं के लिए भी लाभकारी माना जाता है। नियमित अभ्यास से पेल्विक क्षेत्र और जांघों की मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है। यह मासिक धर्म के दौरान होने वाली ऐंठन और तनाव को कम करने में मददगार हो सकता है।
गर्भावस्था के दौरान किसी भी योगासन को करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है। भद्रासन में बैठते समय शरीर को सीधा रखने पर रीढ़ की मुद्रा बेहतर बनी रहती है। बैठने वाली हड्डियों को जमीन पर टिकाने से शरीर को स्थिरता मिलती है और रीढ़ को लंबा रखने में मदद मिलती है। योग के अन्य आसनों की तरह भद्रासन का नियमित अभ्यास मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी भी योगासन को करते समय शरीर की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। दर्द या असहजता महसूस होने पर आसन को जबरदस्ती करने से बचें।


