बिलासपुर 12 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले में आरोप लगाने वाली एक महिला ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए जांच अधिकारियों को बदलने और महिला अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस एके प्रसाद की अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए गृह सचिव समेत संबंधित पक्षकारों को जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त वाले सप्ताह में होगी।
गौरतलब है कि पीड़िता सब इंस्पेक्टर की पत्नी की ओर से एडवोकेट अभिषेक पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि मामले की जांच के लिए तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और तत्कालीन DIG मिलना कुर्रे को जिम्मेदारी दी गई थी। महिला ने इन अधिकारियों से निष्पक्ष जांच को लेकर आशंका जताई है। याचिका के मुताबिक, महिला का कहना है कि एक जांच अधिकारी आरोपी अधिकारी के समान रैंक पर पदस्थ रहे हैं, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे जूनियर थीं। इसी आधार पर जांच अधिकारियों को हटाकर किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी, विशेष रूप से महिला IAS अधिकारी से जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि महिला ने जांच अधिकारियों को बदलने के लिए केंद्रीय गृह सचिव, राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और गृह विभाग के सचिव के समक्ष आपत्ति भी दर्ज कराई थी। हालांकि, आरोप है कि इस आपत्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी अदालत के सामने रखा गया कि रतनलाल डांगी के निलंबन के बाद 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र जारी नहीं किया गया। महिला ने अपनी याचिका में बताया है कि वह योग सिखाती हैं। इसी दौरान उनकी पहचान तत्कालीन IG रतनलाल डांगी से हुई।
महिला के अनुसार, शुरुआत में ऑनलाइन योग क्लास के दौरान दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी। आरोप है कि कुछ समय बाद वीडियो कॉल के दौरान अधिकारी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करना शुरू किया। महिला का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। साथ ही, पुलिस विभाग में कार्यरत उनके पति के खिलाफ कार्रवाई कराने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
अवैध संपत्ति की जांच और बर्खास्तगी की भी मांग
इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका में रतनलाल डांगी की कथित अवैध संपत्ति की जांच कराने और आरोप सिद्ध होने की स्थिति में उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की मांग भी की गई है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह तर्क भी दिया गया कि अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच रतनलाल डांगी समान रैंक यानी IG पद पर थे। याचिका में आनंद छाबड़ा से जुड़े एक अन्य आपराधिक प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि जांच से जुड़े अधिकारियों के पूर्व पद और परिस्थितियों के कारण निष्पक्षता को लेकर आशंका पैदा होती है।
अब सरकार के जवाब पर नजर
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षकारों से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच की मौजूदा व्यवस्था को लेकर अदालत क्या रुख अपनाती है। फिलहाल इस मामले में यौन उत्पीड़न के आरोप, जांच की निष्पक्षता और जांच अधिकारियों को बदलने की मांग तीनों प्रमुख मुद्दे बनकर सामने आए हैं। कोर्ट की अगली सुनवाई पर इन पहलुओं पर होने वाली बहस पर सभी की नजर रहेगी।


