नई दिल्ली 10 अगस्त 2026। दुनिया के सामने तेजी से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी दवाओं के बेअसर होने के खतरे के बीच भारत से राहत देने वाली खबर सामने आई है। दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों से निपटने के लिए नई एंटीबायोटिक दवाओं पर हो रहा काम मेडिकल साइंस के लिए बड़ी उम्मीद माना जा रहा है। अगर मौजूदा दवाओं पर बेअसर हो चुके संक्रमणों के खिलाफ ये नई दवाएं प्रभावी साबित होती हैं, तो गंभीर मरीजों के इलाज में नए विकल्प मिल सकते हैं।
एंटीबायोटिक्स ने मेडिकल साइंस को कई गंभीर संक्रमणों से लड़ने की ताकत दी है। लेकिन अब बैक्टीरिया लगातार इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं। यही स्थिति एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहलाती है। आसान भाषा में समझें तो जिस बीमारी पर पहले एक सामान्य एंटीबायोटिक असर कर जाती थी, वही दवा अब कुछ बैक्टीरिया पर काम नहीं करती। ऐसे बैक्टीरिया को आमतौर पर ‘सुपरबग्स’ कहा जाता है। AMR का असर सिर्फ सामान्य संक्रमणों तक सीमित नहीं है।
अगर एंटीबायोटिक्स लगातार बेअसर होती गईं, तो सर्जरी, कैंसर कीमोथेरेपी, अंग प्रत्यारोपण और गंभीर संक्रमणों का इलाज भी ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। कई ऐसी मेडिकल प्रक्रियाएं हैं जिनमें संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी एंटीबायोटिक्स बेहद जरूरी होती हैं। ऐसे में दवा-प्रतिरोध बढ़ने का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ सकता है।
47 लाख से ज्यादा मौतों से जुड़ा AMR
दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों का खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा वैश्विक आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 2021 में बैक्टीरियल AMR से करीब 47 लाख मौतें जुड़ी थीं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी मौतों की थी, जिनमें दवा-प्रतिरोध ने संक्रमण के इलाज को मुश्किल बनाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO भी AMR को दुनिया के प्रमुख स्वास्थ्य संकटों में शामिल करता है और नई प्रभावी एंटीबायोटिक्स विकसित करने की जरूरत पर जोर देता रहा है।
भारत में नई एंटीबायोटिक्स पर रिसर्च से जगी उम्मीद
इसी गंभीर चुनौती के बीच भारत में नई एंटीबायोटिक दवाओं और दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के इलाज पर रिसर्च तेजी से आगे बढ़ रही है।लखनऊ स्थित CSIR-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CDRI) की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने भी नई एंटीबायोटिक्स और AMR के खिलाफ शोध की जरूरत को रेखांकित किया है। नई दवाओं का विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बैक्टीरिया मौजूदा एंटीबायोटिक्स के खिलाफ प्रतिरोधी हो चुके हैं। ऐसे में नई दवाएं मरीजों के लिए इलाज के नए विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं।
सिर्फ नई दवा से खत्म नहीं होगा संकट
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक, AMR की समस्या का समाधान केवल नई एंटीबायोटिक खोज लेने से नहीं होगा। दवाओं का सही और जिम्मेदारी से इस्तेमाल भी बेहद जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना, वायरल सर्दी-जुकाम में खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना या इलाज को मनमाने तरीके से बीच में छोड़ना दवा-प्रतिरोध को बढ़ावा दे सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह और जरूरत के मुताबिक करना जरूरी है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है भारत की पहल
AMR की चुनौती किसी एक देश तक सीमित नहीं है। बैक्टीरिया और संक्रमण सीमाओं से बंधे नहीं होते। ऐसे में भारत में विकसित होने वाली नई दवाएं अगर दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी साबित होती हैं, तो इसका फायदा भारत के साथ-साथ दूसरे देशों के मरीजों को भी मिल सकता है।


