रायपुर 10 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में हरेली पर्व से ठीक पहले पोस्टर पॉलिटिक्स को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के राजधानी में लगे हरेली से जुड़े पोस्टर को लेकर साय सरकार पर तीखा हमला बोला है। बैज ने पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की राउत नाचा वाली तस्वीर लगाए जाने पर सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि…..“अब सरकार कौन से अफीम के नशे में चल रही है, यह भी पता नहीं।” उन्होंने सवाल उठाया कि हरेली के पोस्टर में मुख्यमंत्री की तस्वीर गेड़ी वाली होनी चाहिए या फिर राउत नाचा वाली ?
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के पहले लोक पर्व हरेली को लेकर आम लोगों के साथ ही राजनीतिक पार्टियां भी तैयारी में जुट गयी है। लेकिन इन्ही तैयारियों के बीच पोस्टर में छपे फोटो और छत्तीसगढ़ महतारी की फोटो को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गयी है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने होर्डिग्स में लगाये गये पोस्टर को लेकर एक बार फिर सरकार को घेरने की कोशिश की है। दीपक बैज ने कहा कि…..“सरकार को हमारी छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और हमारे त्यौहारोें का प्रचार प्रसार करना चाहिए। लेकिन सरकार सिर्फ पोस्टरों तक सीमित है। दीपक बैज ने पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।
वहीं हरेली से जुड़े पोस्टर में मुख्यमंत्री की राउत नाचा वाली तस्वीर लगाए जाने को लेकर बैज ने रकार पर निशाना साधा। दीपक बैज ने अपनी बात रखते हुए कहा कि…राउत नाचा हरेली का पर्व नहीं, बल्कि गोवर्धन पूजा और दीपावली से जुड़ी लोक परंपरा है, जबकि हरेली पर्व में लोग गेढ़ी चढ़ते है, ऐसे में मुख्यमंत्री को गेढ़ी चढ़ने वाली फोटो पोस्टर में डालना चाहिए। बैज ने तंज कसते हुए सवाल किया कि “अब सरकार कौन से अफीम के नशे में चल रही है, यही नहीं पता।” उन्होंने सरकार के साथ-साथ सलाहकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह हरेली के पोस्टर में सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है, उससे लगता है कि सरकार और उसके सलाहकार ही तय नहीं कर पा रहे हैं कि किस पर्व के साथ कौन-सी परंपरा जुड़ी है।
हरेली से पहले पोस्टर बना सियासी मुद्दा
हरेली पर्व के ठीक पहले मुख्यमंत्री के पोस्टर को लेकर कांग्रेस के इस हमले ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। कांग्रेस जहां इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पहचान से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से इस बयान पर पलटवार की संभावना है। पोस्टर में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर का न होना और मुख्यमंत्री की राउत नाचा वाली तस्वीर लगाए जाने को कांग्रेस ने अब सांस्कृतिक पहचान और सरकारी समझ का मुद्दा बना दिया है। ऐसे में हरेली पर्व से ठीक पहले पोस्टर को लेकर शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।


